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Poems on Mother: मां तेरे आंचल की छांव में, मैंने पाया जीवन का पहला प्यार.., पढें मां पर कविता हिंदी में

Poem on Mother in Hindi: इन कविताओं को मातृ दिवस (Mother's Day 2025) पर आप अपनी मां को समर्पित करके पढ़ सकते हैं। इन्हें Instagram, WhatsApp, या Facebook के जरिए भी मां के सम्मान में शेयर कर सकते हैं। तो अगर आपको ये कविताएं पसंद आई हैं तो इन्हें आप मां के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

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Poems on Mother: मां पर कविता हिंदी में, मां पर कविताएं

Poem on Mother in Hindi: मां वो अनमोल रत्न है जो हर किसी के जीवन की पहली गुरु और मार्गदर्शक होती है। उसकी ममता का कोई मोल नहीं। वह अपने बच्चों के लिए हर त्याग करती है, फिर भी कभी शिकायत नहीं करती। मां की दुआएं हर मुश्किल में ढाल बनती हैं। उसके आंचल की छांव में ही जीवन का सच्चा सुख छुपा है। मां भारतीय संस्कृति और साहित्य में प्रेम, त्याग और ममता का प्रतीक मानी जाती है। हिंदी साहित्य में कई कवियों ने मां की महिमा को अपनी रचनाओं में खूबसूरती से व्यक्त किया है। मां की ममता, बलिदान और जीवन में उनकी भूमिका को दर्शाते हुए कई कविताएं लिखी गई हैं। आइए नजर डालते हैं मां पर लिखी कुछ बेहद शानदार कविताओं पर एक नजर:

1. सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता मां की ममता और उसके आलिंगन में मिलने वाले सुख को व्यक्त करती है। इसका शीर्षक है मां:

मां, तेरे आंचल की छांव में,

मैंने पाया जीवन का पहला प्यार,

तेरी गोद में जो सुख मिला,

वह न मिला संसार के बाज़ार।

तेरे आंसुओं ने सिखाया मुझे,

हर दुख को हंसकर सहना,

मां, तू ही मेरा संसार है,

तेरे बिना सब कुछ अधूरा।

2. मैथिलीशरण गुप्त इस कविता में मां के आलिंगन को मंदिर की तरह पवित्र और जीवन का आधार बताते हैं। शीर्षक है मां का आलिंगन:

मां का आलिंगन, वो पवित्र मंदिर,

जहां हर दुख का अंत होता है,

उसकी एक मुस्कान से,

जीवन का हर रंग संवरता है।

तेरे आंचल में छुपा है,

सारा जहान का प्यार,

मां, तेरे बिना ये जीवन,

है बस एक अंधा संसार।

3. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' यह कविता मां के बलिदान और उसकी ममता की गहराई को सागर से तुलना करके व्यक्त करती है:

मां की ममता, वो सागर गहरा,

जिसमें डूबकर जीवन तट पाता,

हर कष्ट को वो हँसकर सहती,

फिर भी चेहरा उसका मुस्कुराता।

तेरे बलिदान की गाथा,

हर पल मुझे सिखाती है,

मां, तू ही वो दीपक है,

जो अंधेरे में राह दिखाती है।

4. तेरे बिना शीर्षक वाली यह लोकप्रिय कविता मां की अनुपस्थिति के दुख और बचपन की यादों को मार्मिक रूप से व्यक्त करती है:

मां, तेरे बिना ये आंगन सूना,

तेरी बातों का वो मधुर सपना,

चूल्हे की आग, वो रोटी की खुशबू,

अब कहां वो बचपन का अनुपम मधु।

तेरे कदमों की आहट,

अब भी कानों में गूंजती है,

मां, तू ही वो साया है,

जो हर पल मुझको थामती है।

5. कुंवर नारायण की यह कविता मां की दुआओं को जीवन की शक्ति और मार्गदर्शक के रूप में चित्रित करती है। शीर्षक है मां की दुआ:

मां की दुआएं, वो अमृत बूंदें,

जो जीवन को हर पल सींचती हैं,

हर कदम पर वो मेरे साथ हैं,

मुझको मुश्किलों से बचाती हैं।

तेरे आशीर्वाद की छांव में,

मैंने हर सपना पाया है,

मां, तू वो शक्ति है,

जिसने मुझे जीना सिखाया है।

इन कविताओं को मातृ दिवस (Mother's Day 2025) पर आप अपनी मां को समर्पित करके पढ़ सकते हैं। इन्हें Instagram, WhatsApp, या Facebook के जरिए भी मां के सम्मान में शेयर कर सकते हैं। तो अगर आपको ये कविताएं पसंद आई हैं तो इन्हें आप मां के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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