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चेतक की चार लाइन से PM नरेंद्र मोदी ने बताई हिंदुस्तान की ताकत, पढ़ें महाराणा प्रताप के घोड़े पर लिखी वह पूरी कविता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदमपुर एयरबेस से कहा कि जब हमारे ड्रोन दुश्मन के किले की दीवारें ध्वस्त करते हैं, जब हमारी मिसाइलें सनसनाती हुई आवाज के साथ लक्ष्य तक पहुंचती हैं, तो दुश्मन को 'भारत माता की जय' सुनाई देती है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक पर लिखी कविता की चार लाइनें भी पढ़ीं।

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पीएम मोदी ने पढ़ी महाराणा प्रताप के चेतक पर लिखी कविता

ऑपरेशन सिंदूर पर देश को संबोधित करने के बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जालंधर के आदमपुर एयरबेस से हिंदुस्तान की ताकत बताई। उन्होंने भारत के सैन्य बलों के पराक्रम का जिक्र कर पाकिस्तान को दो टूक कह दिया कि अगर भारत की धरती पर बॉर्डर पार से किसी भी तरह की आतंकवादी घटना होगी तो हम घर में घुस कर मारेंगे। उन्होंने कहा कि जब हमारे ड्रोन दुश्मन के किले की दीवारें ध्वस्त करते हैं, जब हमारी मिसाइलें सनसनाती हुई आवाज के साथ लक्ष्य तक पहुंचती हैं, तो दुश्मन को 'भारत माता की जय' सुनाई देती है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक पर लिखी कविता की ये चार लाइनें भी पढ़ीं:

कौशल दिखलाया चालों में,

उड़ गया भयानक भालों में।

निर्भीक गया वह ढालों में,

सरपट दौड़ा करबालों में।

दरअसल चेतक महाराणा प्रताप का वफादार घोड़ा था। वह भारतीय इतिहास में एक प्रतीक बन गया है। यह घोड़ा न केवल अपनी शक्ति और गति के लिए प्रसिद्ध था, बल्कि अपनी स्वामिभक्ति के लिए भी जाना जाता है। चेतक की सबसे बड़ी ख्याति 1576 में हल्दीघाटी के युद्ध से मिली। इस युद्ध में महाराणा प्रताप ने अकबर की विशाल सेना का सामना किया। चेतक ने अपनी तेज़ी और साहस से महाराणा को युद्ध में बढ़त दिलाई। चेतक की वीरता और बलिदान ने उसे अमर कर दिया।

चेतक की वीरता पर कवि श्याम नारायण पांडे ने बेहद खूबसूरत कविता लिखी है। आदमपुर के अपने संबोधन में पीएम मोदी ने इसी कविता की चार लाइनें पढ़ी थीं। आइए पढ़ते हैं वह पूरी कविता:

रण बीच चौकड़ी भर – भर कर,

चेतक बन गया निराला था।

राणा प्रताप के घोड़े से,

पड़ गया हवा का पाला था।

गिरता न कभी चेतक तन पर,

राणा प्रताप का कोड़ा था।

वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर,

या आसमान पर घोड़ा था।

जो तनिक हवा से बाग हिली,

लेकर सवार उड़ जाता था।

राणा की पुतली फिरी नहीं,

तब तक चेतक मुड़ जाता था।

है यहीं रहा, अब यहां नहीं,

वह वहीं रहा था यहां नहीं।

थी जगह न कोई जहां नहीं

किस अरि – मस्तक पर कहां नहीं।

कौशल दिखलाया चालों में,

उड़ गया भयानक भालों में।

निर्भीक गया वह ढालों में,

सरपट दौड़ा करबालों में।

बढ़ते नद सा वह लहर गया,

वह गया गया फिर ठहर गया।

विकराल वज्रमय बादल सा

अरि की सेना पर घहर गया।

भाला गिर गया, गिरा निशंग,

हय टापों से खन गया अंग।

बैरी समाज रह गया दंग,

घोड़े का ऐसा देख रंग।

बता दें कि चेतक की समाधि आज भी राजस्थान के हल्दीघाटी क्षेत्र में मौजूद है। यहां लोग उसे श्रद्धांजलि देते हैं। चेतक की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची वफादारी और साहस किसी भी प्राणी में हो सकता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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