How to teach kids about Need and Want: बच्चे जब दुकान में किसी खिलौने या चॉकलेट के लिए जिद करने लगते हैं, तो बहुत से पेरेंट्स परेशान हो जाते हैं। असल में बच्चे यह समझ ही नहीं पाते कि किसी चीज की जरूरत होना और उसे चाहना दोनों अलग बातें हैं। पेरेंट्स उन्हें समझदारी और सही तरीके से ये सिखाएं तो बच्चे जल्दी समझ जाते हैं।
जरूरत और इच्छा में क्या फर्क होता है
सबसे पहले बच्चों को आसान भाषा में बताएं कि जरूरत उसे कहते हैं जिसके बिना जीना मुश्किल है, जैसे खाना, पानी, घर और कपड़े। दूसरी तरफ इच्छा वो है जो अच्छी लगती है, मन को खुश करती है, लेकिन उसके बिना भी काम चल सकता है, जैसे नया खिलौना, चॉकलेट या फिर कुछ और। बच्चों को यह समझाते वक्त डराने वाली भाषा का इस्तेमाल न करें, बस सीधे और सरल उदाहरण दें।
डेली लाइफ की चीजों से समझाएं
बच्चे उदाहरणों से सबसे जल्दी सीखते हैं। किराने की दुकान पर जाते वक्त उन्हें बताएं हमें ब्रेड और दूध चाहिए, यह जरूरत है। लेकिन चॉकलेट या आइसक्रीम सिर्फ हमारी इच्छा है। इस तरह की छोटी-छोटी बातें रोजाना दोहराने से बच्चों के दिमाग में यह फर्क धीरे-धीरे साफ होने लगता है।
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खेल-खेल में सिखाएं
घर में मौजूद चीजों की एक लिस्ट बनाकर उनसे पूछें कि ये जरूरत है इच्छा। जैसे पानी की बोतल, स्कूल बैग, खिलौना कार, छाता। बच्चे जब खुद सोचकर जवाब देंगे, तो यह कॉन्सेप्ट उनकी समझ में गहराई से बैठेगा। चाहें तो दो डिब्बे बनाकर एक पर जरूरत और दूसरे पर इच्छा लिखकर तस्वीरें या चीजें छांटने का खेल भी खेला जा सकता है।
दोस्तों की देखा-देखी पर बात करें
बड़े होते बच्चे अक्सर दोस्तों को देखकर किसी चीज की मांग करते हैं। ऐसे में उन्हें प्यार से समझाएं कि सिर्फ दूसरों के पास होने से कोई चीज जरूरत नहीं बन जाती। उनसे पूछें कि क्या इसके बिना तुम्हारा काम रुक जाएगा? इस सवाल से बच्चे खुद फैसला करना सीखते हैं।
पॉकेट मनी से जोड़ें
जिन बच्चों को पॉकेट मनी मिलती है, उन्हें बताएं कि पैसा पहले जरूरतों पर खर्च होता है, बचा हुआ पैसा चाहतों पर। इससे बच्चे बचत और सही खर्च की आदत भी सीखते हैं।
यह आदत एक दिन में नहीं बनती, लेकिन धीरे-धीरे और रोज की बातचीत से बच्चे जरूरत और चाहत में फर्क समझने लगते हैं। यही समझ आगे चलकर उनकी पैसों से जुड़ी अच्छी आदतों की नींव बनती है।
