भारत में ये 3 गैर-संक्रामक बीमारियां खाली कर रही हैं जेब, क्यों बन रहीं भारत की सबसे महंगी बीमारी
- Authored by: Vineet
- Updated Feb 1, 2026, 05:03 PM IST
Non Communicable Diseases India: भारत में डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियां न सिर्फ सेहत, बल्कि जेब पर भी भारी पड़ रही हैं। इलाज, दवाइयों और लंबे समय तक चलने वाले खर्चों की वजह से ये बीमारियां आम परिवारों की कमर तोड़ रही हैं। जानिए क्यों इन्हें भारत की सबसे महंगी बीमारियां माना जा रहा है और इस चुनौती से निपटने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।
ये गैर-संक्रामक बीमारियां कर रहीं जेब खाली (PC- Istock)
Non Communicable Diseases India: भारत में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर गैर-संक्रामक बीमारियों (NCDs) के मामले में। ये बीमारियां जैसे कि डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून रोग, न केवल स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही हैं, बल्कि ये मरीजों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित कर रही हैं। चिकित्सा खर्च में वृद्धि के कारण, आम जनता को इन बीमारियों के इलाज के लिए काफी वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है। हाल ही में पेश किए गए बजट 2026 में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस समस्या के समाधान के लिए कई उपायों की घोषणा की है, जिससे उम्मीद है कि इन बीमारियों का बोझ कुछ हद तक कम होगा।
गैर-संक्रामक बीमारियों का बढ़ता बोझ
भारत में गैर-संक्रामक बीमारियां अब अधिकांश मौतों और बीमारियों का कारण बन रही हैं। 1990 में NCDs के कारण होने वाली मौतों का अनुपात 37.9% था, जो 2016 में बढ़कर 61.8% हो गया। यह वृद्धि चिंताजनक है, क्योंकि यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य प्रणाली को इन बीमारियों से निपटने के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता है।महंगे इलाज की चुनौती
डायबिटीज से लेकर कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों तक, इन बीमारियों के इलाज के लिए लंबे समय तक महंगे उपचार की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, कैंसर के लिए जैविक दवाएं और डायबिटीज के लिए इंसुलिन की लागत आम जनता के लिए बोझ बन गई है।बजट 2026 में 'बायोफार्मा शक्ति' का प्रस्ताव
वित्त मंत्री ने बजट 2026 में 'बायोफार्मा शक्ति' नामक एक योजना की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य भारत में बायोफार्मास्यूटिकल निर्माण को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और महंगे इलाज की लागत को कम किया जा सकेगा।नवीनता की ओर बढ़ता भारत
भारत पहले से ही जनरल दवाओं के उत्पादन में एक प्रमुख स्थान रखता है, लेकिन अब इसे बायोलॉजिक्स और नई तकनीकों में भी खुद को स्थापित करना होगा। इससे न केवल घरेलू मांग को पूरा किया जा सकेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी।सकारात्मक बदलाव की संभावना
यदि 'बायोफार्मा शक्ति' योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह उपचार की लागत को कम कर सकती है और मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं तक पहुंच को आसान बना सकती है। इससे न केवल स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होंगे, बल्कि आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।भारत में गैर-संक्रामक बीमारियों का बढ़ता बोझ एक गंभीर समस्या है, लेकिन बजट 2026 में उठाए गए कदमों से उम्मीद है कि इस दिशा में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। यह न केवल मरीजों के लिए बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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