Tata Sons AGM : टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की 108वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) मंगलवार को बिना किसी फैसले के स्थगित कर दी गई। 108 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका है जब टाटा संस को कोरम (बैठक के लिए जरूरी न्यूनतम सदस्यों की मौजूदगी) पूरा न होने के कारण अपनी AGM टालनी पड़ी। दक्षिण मुंबई स्थित टाटा ग्रुप के मुख्यालय 'बॉम्बे हाउस' में शुरू हुई इस बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने जरूरी सदस्यों का आधे घंटे तक इंतजार किया, लेकिन कोरम पूरा न होने पर इसे स्थगित कर दिया गया। इस घटनाक्रम के कारण कंपनी के वित्तीय वर्ष 2025-26 के वित्तीय परिणामों की मंजूरी, टाटा ट्रस्ट्स के लिए महत्वपूर्ण लाभांश (डिविडेंड) का भुगतान और चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के पुनर्चयन से जुड़ा फैसला अटक गया है।
कोरम न पूरा होने की असली वजह
टाटा संस के आंतरिक नियमों के अनुच्छेद 86 के अनुसार, AGM के संचालन के लिए कम से कम पांच सदस्यों की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होता है। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि इन पांच सदस्यों में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) द्वारा संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधि का मौजूद होना जरूरी है, क्योंकि इन दोनों ट्रस्टों की टाटा संस में 51% से अधिक हिस्सेदारी है। बैठक स्थगित होने का मुख्य कारण महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की एक रेगुलेटरी एक्शन है। चैरिटी कमिश्नर ने एसआरटीटी (SRTT) पर कोई भी बड़ा फैसला लेने या बैठक आयोजित करने पर रोक लगा रखी है। इस बैन की वजह से एसआरटीटी और एसडीटीटी मिलकर अपना संयुक्त प्रतिनिधि नामित नहीं कर सके। फिर भी एसडीटीटी ने टाटा संस को पहले ही सूचित कर दिया था कि ट्रस्ट कोरम की शर्त पूरी करने में असमर्थ होंगे, फिर भी वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करने के लिए टाटा संस ने निर्धारित समय पर बैठक आयोजित की।
टाटा संस की AGM क्यों स्थगित हुई? 5 मुख्य वजहें
- कोरम पूरा नहीं हुआ:- एजीएम के लिए जरूरी न्यूनतम सदस्यों की मौजूदगी नहीं हो सकी, इसलिए बैठक स्थगित करनी पड़ी।
- दो प्रमुख ट्रस्ट प्रतिनिधि नहीं चुन सके:- सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) संयुक्त रूप से अपना प्रतिनिधि नामित नहीं कर पाए।
- SRTT पर प्रतिबंध:-महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने SRTT को बड़े फैसले लेने या बैठक करने से रोक रखा है। इसी वजह से ट्रस्ट प्रतिनिधि नामित नहीं कर सका।
- टाटा संस के नियमों के कारण अड़चन:- कंपनी के अनुच्छेद 86 के मुताबिक एजीएम में कम-से-कम पांच सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है, जिसमें दोनों ट्रस्टों का संयुक्त प्रतिनिधि भी शामिल है।
- बैठक में अहम फैसले होने थे:- एजीएम में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के निदेशक पद पर बने रहने, वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय नतीजों और लाभांश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला होना था।
टाटा संस की ऐतिहासिक AGM स्थगित: जानिए क्या रहा मुख्य कारण
चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के पद और उत्तराधिकार पर असर
इस बैठक का एक मुख्य एजेंडा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का डायरेक्टर पद पर पुनर्चयन था। वह बोर्ड में सबसे लंबे समय से सेवा देने वाले गैर-स्वतंत्र डायरेक्टर हैं। हालांकि, कानून विशेषज्ञों के अनुसार, AGM स्थगित होने से चंद्रशेखरन के निदेशक पद को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। कंपनी कानून के तहत जब तक बैठक दोबारा आयोजित कर औपचारिक मतदान नहीं हो जाता, तब तक यथास्थिति बनी रहती है और वे अपने पद पर बने रहेंगे।
गौर हो कि चंद्रशेखरन पहले ही 12 अगस्त को यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे फरवरी में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा चेयरमैन बनने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने बताया था कि बोर्ड के एक डायरेक्टर ने उनकी पुनर्नियुक्ति का विरोध किया था और सहमति न बन पाने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। 17 सितंबर को प्रस्तावित बोर्ड बैठक में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर उनके इस फैसले को दर्ज कर सकता है और एसडीटीटी के समर्थन के बाद नए उत्तराधिकारी की चयन प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो सकती है।
बैठक में कौन मौजूद था और कौन रहा गायब?
बॉम्बे हाउस में आयोजित इस बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, स्वतंत्र डायरेक्टर अनिता जॉर्ज और एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर व सीएफओ सौरभ अग्रवाल व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और स्वतंत्र डायरेक्टर हरीश मनवानी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। अन्य शेयरधारकों और अधिकारियों की उपस्थिति इस प्रकार रही। शापूरजी पालोनजी ग्रुप (18.4% हिस्सेदारी) रखने वाले विनय कर्वे और श्रीराम हेगड़े ने प्रतिनिधित्व किया। मेहली मिस्त्री उपस्थित रहे। अन्य शेयरधारक में छोटा उदयपुर राजपरिवार के सदस्य जय प्रतापसिंह चौहान और टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों (टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा केमिकल्स, टाटा कंज्यूमर, टाटा पावर, इंडियन होटल्स) के मैनेजिंग डारेक्टर्स व सीएफओ ने प्रतिनिधित्व किया। नोएल टाटा के बच्चे माया और नेविले टाटा, जो टाटा संस के सबसे नए शेयरधारक हैं, इस बैठक से अनुपस्थित रहे।
आगे का रास्ता और कंपनी के विकल्प
टाटा संस के नियमों के अनुसार, स्थगित AGM का आयोजन अगले सप्ताह उसी दिन किया जा सकता है या बोर्ड नई तारीख तय कर सकता है। हालांकि, जब तक एसआरटीटी और एसडीटीटी के संयुक्त प्रतिनिधि की शर्त पूरी नहीं होती, तब तक यही समस्या बनी रहेगी। कंपनी अधिनियम के तहत टाटा संस के पास 30 सितंबर तक अपनी AGM पूरी करने का समय है। अगर रेगुलेटरी बाधाएं बनी रहती हैं, तो कंपनी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से तीन महीने का विस्तार मांग सकती है, जिससे समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ जाएगी।
कानूनी एक्सपर्ट्स का मानना है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के पिछले फैसलों के अनुसार, किसी ट्रस्ट पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई से उसकी आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था या दिन-प्रतिदिन के कामकाज में रुकावट नहीं आनी चाहिए। चैरिटी कमिश्नर के अधिकारों का इस्तेमाल ट्रस्ट को बैठक करने या वोटिंग अधिकार का प्रयोग करने से रोकने के लिए नहीं किया जा सकता। एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब तक एसआरटीटी से प्रतिबंध नहीं हटता या कोई वैकल्पिक कानूनी समाधान नहीं निकलता, तब तक यह अनिश्चितता बनी रह सकती है।
