Newborn Me Piliya: जब घर में नन्हे मेहमान का जन्म होता है तो हर छोटी चीज पर ध्यान जाता है। कई बार जन्म के 2-3 दिन बाद बच्चे की त्वचा या आंखें हल्की पीली दिखने लगती हैं, जिसे देखकर माता-पिता घबरा जाते हैं। लेकिन सच यह है कि नवजात शिशुओं में पीलिया होना बहुत आम बात है। ज्यादातर मामलों में यह कोई गंभीर बीमारी नहीं होती, बल्कि बच्चे के शरीर में हो रहे प्राकृतिक बदलावों का हिस्सा होती है। जन्म के बाद बच्चे का शरीर नए माहौल के अनुसार खुद को ढालता है और इसी दौरान कुछ केमिकल बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से पीलापन नजर आ सकता है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि आखिर यह समस्या क्यों होती है।
नवजात में पीलिया क्यों दिखने लगता है
जन्म के बाद बच्चे के शरीर को अचानक कई नई प्रक्रियाएं शुरू करनी पड़ती हैं। गर्भ में रहने के दौरान बच्चे का शरीर अलग तरीके से काम करता है, लेकिन जन्म के बाद उसे खुद सांस लेना, खाना पचाना और शरीर की सफाई करना सीखना पड़ता है। इसी बदलाव के दौरान खून में एक पीला पदार्थ बढ़ सकता है, जिससे त्वचा पीली दिखने लगती है। यही कारण है कि यह समस्या बहुत आम मानी जाती है।
बिलीरुबिन बढ़ने से होता है पीलिया
पीलिया होने की सबसे बड़ी वजह बिलीरुबिन नाम का पदार्थ होता है। जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं टूटती हैं, तो बिलीरुबिन बनता है। नवजात शिशुओं में ये कोशिकाएं ज्यादा मात्रा में होती हैं और जल्दी टूटती भी हैं। ऐसे में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। जब यह ज्यादा हो जाता है, तो त्वचा और आंखों में पीलापन दिखने लगता है।
लिवर धीरे-धीरे मजबूत होता है
नवजात शिशु का लिवर पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए वह बिलीरुबिन को जल्दी बाहर नहीं निकाल पाता। लिवर का काम शरीर से गंदे पदार्थों को बाहर निकालना होता है, लेकिन शुरुआती दिनों में यह प्रक्रिया थोड़ी धीमी रहती है। जैसे-जैसे लिवर बेहतर तरीके से काम करने लगता है, पीलिया अपने आप कम होने लगता है।
स्तनपान से जुड़ी स्थिति भी हो सकती है वजह
कुछ बच्चों में पीलिया का संबंध स्तनपान से भी जुड़ा होता है। अगर शुरुआती दिनों में बच्चे को पर्याप्त दूध नहीं मिल पाता, तो शरीर से बिलीरुबिन बाहर निकलने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। सही तरीके से और समय पर फीडिंग कराने से इस स्थिति में सुधार देखा जा सकता है। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर नियमित स्तनपान की सलाह देते हैं।
समय से पहले जन्मे बच्चों में ज्यादा दिखता है पीलिया
जो बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं, उनमें पीलिया होने की संभावना थोड़ी ज्यादा रहती है। इसका कारण यह है कि उनका लिवर और शरीर के अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते। ऐसे बच्चों को थोड़ा ज्यादा ध्यान और डॉक्टर की निगरानी की जरूरत हो सकती है, ताकि स्थिति सामान्य बनी रहे।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है
अधिकतर मामलों में पीलिया कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन अगर बच्चे का पीलापन तेजी से बढ़ रहा है, बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त लग रहा है या ठीक से दूध नहीं पी रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है। सही समय पर जांच कराने से किसी भी परेशानी से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
