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Mirza Ghalib Shayari: मैं भी मुंह में जबान रखता हूं, काश पूछो कि मुद्दा क्या है.., पढ़ें मिर्जा गालिब के 15 मशहूर शेर

Mirza Ghalib Shayari: मिर्जा गालिब महज एक शायर ही नहीं बल्कि दार्शनिक भी थे। उनकी शायरी में उनका दर्शन बखूबी नजर आता है। वे साधारण शब्दों में बड़ी आसानी से गहरे विचार बयां कर जाते। उनकी शायरी में वो जादू है कि जो एक बार पढ़ ले तो उसी में डूब कर रह जाता है।

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मिर्ज़ा गालिब के मशहूर शेर (Photo: Ghalib Academy fb)

Mirza Ghalib Shayari in Hindi: मिर्जा गालिब का असली नाम मिर्जा असदुल्लाह खां 'गालिब' थी। वह उर्दू और फारसी शायरी के कितने चमकीले सितारे थे, ये बताने की जरूरत नहीं है। उनकी शायरियां आज भी लोगों के जुबान पर चढ़ी हुई हैं। दिल्ली में जन्मे गालिब ने अपनी शायरी में प्रेम, दर्द और जीवन के दर्शन को बखूबी पिरोया। गालिब का जीवन भले मुश्किलों से भरा था लेकिन उनकी शायरी में गहराई के साथ ही एक अजीब सी मस्ती झलकती थी। यहां पढ़ें मिर्जा गालिब के चंद मशहूर शेर:

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1. हुआ है शह का मुसाहिब फिरे है इतराता

वगरना शहर में 'ग़ालिब' की आबरू क्या है

2. मौत का एक दिन मुअय्यन है

नींद क्यूं रात भर नहीं आती

3. कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को

ये ख़लिश कहां से होती जो जिगर के पार होता

4. इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना

दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

5. इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया

दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया

6. हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है

वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता

7. निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन

बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले

8. तुम सलामत रहो हज़ार बरस

हर बरस के हों दिन पचास हज़ार

9. आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हंसी

अब किसी बात पर नहीं आती

10. आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक

कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

11. देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़

इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है

12. मैं भी मुंह में ज़बान रखता हूँ

काश पूछो कि मुद्दआ क्या है

13. क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ

रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन

14. बस-कि दुश्वार है हर काम का आसान होना

आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसान होना

15. गो हाथ को जुम्बिश नहीं आंखों में तो दम है

रहने दो अभी साग़र-ओ-मीना मिरे आगे

ऐसा हो ही नहीं सकता है कि मिर्जा गालिब के ये शेर आपको पसंद ना आए हो। अगर इन शायरियों ने आपके दिल को छुआ है तो आप इन्हें अपनों के साथ भी शेयर कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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