देश में इस समय नीट पेपर लीक को लेकर हंगामा मचा हुआ है। राजधानी दिल्ली ही नहीं बल्कि देशभर में युवाओं द्वारा मौजूदा परीक्षा प्रणाली में बदलाव को लेकर जोरदार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रदर्शनों का परिणाम था कि मौजूदा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा तक देना पड़ गया है। इस बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक और अहम सुधारों के लिए हाई पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। पीएम मोदी ने युवाओं के लिए जारी अपने वीडियो संदेश में इसका एलान किया। इसमें उन्होंने बताया कि इस हाई पावर टास्क फोर्स का नेतृत्व देश के जाने-माने टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि करेंगे। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि नंदन नीलेकणि आखिर हैं कौन और मोदी सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए आखिर उन पर क्यों भरोसा जताया है, साथ ही इस फोर्स में शामिल अन्य सदस्य कौन-कौन हैं?
आखिर कौन हैं नंदन नीलेकणि ?
नंदन नीलेकणि का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन से ही उनकी रुचि तकनीक और समस्या समाधान में रही। कॉलेज से निकलने के बाद उन्होंने आईटी क्षेत्र में काम शुरू किया और आगे चलकर भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग का ऐसा अध्याय लिखा जिसने देश को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर नई पहचान दिलाई।इंफोसिस की स्थापना और वैश्विक पहचान
साल 1981 में नंदन नीलेकणी ने एन.आर. नारायण मूर्ति और छह अन्य साथियों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की। उस दौर में भारत का आईटी उद्योग शुरुआती अवस्था में था और निजी तकनीकी कंपनियों के लिए संसाधन भी सीमित थे। कई वर्षों के संघर्ष के बाद इंफोसिस ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाई। आर्थिक उदारीकरण के बाद कंपनी ने तेजी से विस्तार किया और भारतीय आईटी सेक्टर की अग्रणी कंपनियों में शामिल हो गई। नीलेकणी ने कंपनी में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और 2002 से 2007 तक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे। उनके नेतृत्व में इंफोसिस ने वैश्विक ग्राहकों के बीच मजबूत भरोसा बनाया और भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग को नई दिशा दी।2009 में मनमोहन सिंह ने सौंपी आधार परियोजना की जिम्मेदारी
नंदन नीलेकणि के करियर का सबसे बड़ा मोड़ 2009 में आया,जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया। यहीं से शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजनाओं में से एक आधार की शुरुआत। आज आधार केवल एक पहचान पत्र नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, मोबाइल कनेक्शन, डिजिटल सत्यापन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और अनेक सार्वजनिक सेवाओं की आधारशिला बन चुका है।
राजनीति में भी रखा कदम
2014 के लोकसभा चुनाव में नंदन नीलेकणि ने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि वे चुनाव हार गए और उसके बाद सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। इसके बाद उन्होंने फिर से तकनीक, नवाचार और सार्वजनिक नीति पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
मोदी सरकार में भी बढ़ा महत्व
2014 में केंद्र में सरकार बदलने के बाद कई लोगों को लगा कि आधार परियोजना बंद हो जाएगी। लेकिन इसके उलट मोदी सरकार ने इसे डिजिटल इंडिया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की रीढ़ बना दिया। आज जनधन खाते, एलपीजी सब्सिडी, छात्रवृत्ति, पेंशन, आयुष्मान भारत, राशन वितरण और बैंकिंग KYC जैसी अनेक सेवाओं में आधार का व्यापक उपयोग होता है।
इंडिया स्टैक और भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था
आधार के अलावा नंदन नीलेकणि India Stack की अवधारणा के प्रमुख समर्थकों में रहे हैं। India Stack के तहत आधार, e-KYC, e-Sign, DigiLocker और UPI जैसी डिजिटल सेवाओं का ऐसा ढांचा तैयार हुआ, जिसने भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं को नई गति दी। आज कई देश भारत के इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं।
क्यों रहते हैं चर्चा में?
नंदन नीलेकणी अक्सर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल गवर्नेंस, डेटा इकोनॉमी और सार्वजनिक तकनीकी ढांचे पर अपने विचार रखते हैं। सरकारें बदलने के बावजूद उनकी तकनीकी विशेषज्ञता के कारण उन्हें नीति निर्माण और डिजिटल सुधारों से जुड़े विभिन्न मंचों पर महत्वपूर्ण भूमिका मिलती रही है।
परीक्षा सुधार में उनकी भूमिका क्यों अहम मानी जा रही है?
सरकार ने जिस समय नंदन नीलेकणी को हाई पावर टास्क फोर्स की जिम्मेदारी सौंपी है,तब देश की परीक्षा प्रणाली कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पेपर लीक,प्रश्नपत्रों की सुरक्षा,परीक्षा केंद्रों की निगरानी,उम्मीदवारों की पहचान,डिजिटल रिकॉर्ड और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता जैसे मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित समाधान इन समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकते हैं। नीलेकणी का अनुभव बड़े स्तर पर डिजिटल सिस्टम तैयार करने का रहा है। करोड़ों लोगों के डेटा और पहचान से जुड़ी आधार जैसी परियोजना को लागू करने का अनुभव उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाता है।
हाई पावर टास्क फोर्स में और कौन-कौन?
एनटीए परीक्षा सुधारों के लिए जिस उच्चस्तरीय कार्य दल का गठन किया गया है। इस बहुविषयक समूह में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं, जो एनटीए परीक्षा प्रणाली को विशेष रूप से प्रौद्योगिकी के परिप्रेक्ष्य से नया रूप देने और प्रणाली में संरचनात्मक सुधार लाने में मदद करेंगे। इनमें प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि के अलावा इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस सोमनाथ, आईबी के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता कारवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीना शामिल हैं।
हाई पावर टास्क फोर्स क्या करेगी?
प्रधानमंत्री के अनुसार,यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए सुझाव तैयार करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य-
- परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना।
- पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं पर तकनीकी नियंत्रण के उपाय सुझाना।
- उम्मीदवारों की पहचान सत्यापन को और मजबूत करना।
- परीक्षा संचालन में डिजिटल तकनीकों का अधिक उपयोग सुनिश्चित करना।
- भविष्य की परीक्षाओं के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय ढांचा तैयार करना।
सरकार का कहना है कि टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर आगामी परीक्षाओं में नई तकनीकों को लागू किया जाएगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और सख्त कानून पर भी सरकार का जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में यह भी कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जा चुके हैं। साथ ही संसद के माध्यम से ऐसे अपराधों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचे को और मजबूत किया जा रहा है। यानी सरकार परीक्षा सुधार को केवल तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे प्रशासनिक, कानूनी और तकनीकी तीनों स्तरों पर मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।