Parenting Tips: बच्चे मां बाप की असली पूंजी होते हैं। पेरेंट्स अपने बच्चों के ब्राइट फ्यूचर के लिए बहुत परिश्रम व त्याग करते हैं। इन सबके बावजूद जहां कुछ बच्चे बहुत तरक्की कर जाते हैं वहीं कुछ इस भीड़ में गायब हो जाते हैं। हर पेरेंट्स यही चाहते हैं कि उसका बच्चा भविष्य में सफल हो और जहां भी जाए वहां छा जाए। बच्चे आत्मविश्वास से भरे हुए होते हैं। इसीलिए कोई भी काम करने से पहले बिल्कुल भी झिझकते या डरते नहीं हैं। लेकिन उम्र के पड़ाव में आगे पहुंचने के साथ ही उनका कॉन्फिडेंस धीरे-धीरे कम होने लगता है।
बच्चे का पहला स्कूल उनका घर होता है जहां वह जीवन की बुनियादी चीजें सीखता है और पहली गुरु उसकी मां होती है। ऐसे में मदर्स की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बच्चे का आत्मविश्वास घटने ना दें।
- सुपर कॉन्फिडेंट बच्चों की मदर्स कभी भी अपने बच्चों के प्यार में अंधी होकर उनकी गलतियों को अनदेखा नहीं करती हैं।
- ऐसी माताएं बच्चे की गलती पर डांट लगाती हैं और अच्छे कार्यों पर तारीफ करने से नहीं चूकती।
- ऐसे बच्चों की मदर्स अपने लाडले के साथ स्वयं भी मेहनत करती हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है।
कैसे बढ़ाएं बच्चों का आत्मविश्वास-
1- नेगेटिव सोच से दूर रखें-
बच्चों के लिए पॉजिटिव माहौल बनाएं। उनके दिमाग में नेगेटिव बातों को घर ना बनाने दें। जैसे तुझसे नहीं होगा, तुम यह नहीं कर सकते। नेगेटिव बातों से बच्चों का सेल्फ कॉन्फिडेंस कम होता है और बच्चे डिमोरलाइज महसूस करते हैं।
2- ना कहना सीखें-
बच्चों की गलत जिद पर ना कहने की आदत डालें। अगर आप बच्चे की हर सही गलत जिद मानते गए तो आपका बच्चा बिगड़ सकता है।
3- बच्चे को समझें
मॉडर्न पेरेंट्स अपने कामकाज के बोझ में इतना व्यस्त हो गए हैं कि बच्चों के साथ समय बिताने का मौका ही नहीं मिलता है। बच्चे अक्सर मां-बाप का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए शरारत करते हैं। अनदेखा फील करने पर बच्चे चिड़चिड़े होने लगते हैं। बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताएं व उन्हें अपनी बातें साझा करने का मौका दें।
4- जिम्मेदारियों का अहसास कराएं
बच्चों को कम उम्र से ही जिम्मेदार बनाने का प्रयास करें। छोटे-मोटे काम उन्हें स्वयं करने दें और जिम्मेदारियां पूरी करने पर उन्हें शाबाशी दें।
हर बच्चे में कोई ना कोई टैलेंट पाया जाता है। सही मार्गदर्शन से बच्चा अपने टैलेंट को समझकर उस पर कार्य करके भविष्य में बहुत कुछ कर सकता है। इसलिए बच्चों का सही मार्गदर्शन करें और उनका सहयोग करें।
(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता।)
