Parenting Tips: हर मां बाप अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं। पेरेंट्स अपनी सारी कमाई और मेहनत अपने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने में लगा देते हैं। बच्चों का भविष्य क्या होगा यह उनके बचपन की देखरेख व पालन पोषण पर निर्भर करता है। बच्चा जब छोटा होता है तो वह बहुत तेजी से चीजों को सिखता है। 5 से 10 वर्ष की उम्र में बच्चों का फ्यूचर डिसाइड हो जाता है। यह उनकी सीखने की सबसे अच्छी उम्र होती है। मां-बाप बच्चों के मोह में कई ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिसके चलते उनके ऊपर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
1- भूलकर भी अपने बच्चे को दूसरे बच्चों से कंपेयर ना करें-
यदि पेरेंट्स अपने बच्चे की हर गलती पर उन्हें दूसरे बच्चों के साथ कंपेयर करते हैं तो इससे बच्चों के अंदर हीन भावना आती है। बच्चे अपने आपको कम आंकने लगते हैं। वह खुद को इनफीरियर के रूप में एक्सेप्ट कर लेते हैं। यहां से बच्चों की फुल ग्रोथ रुक जाती है। वह अपने पूरे पोटेंशियल से किसी भी काम को करने में असमर्थ हो जाते हैं। इसलिए बच्चों की दूसरे बच्चों के साथ तुलना करने से बचें।
2- बेवजह ना लगाएं डांट फटकार-
यदि बच्चे की हर छोटी-बड़ी गलती पर आप उन्हें डाटेंगे तो वह इसके आदती हो जाएंगे और उनके ऊपर आपकी डांट फटकार का कोई असर नहीं पड़ेगा। इसलिए कोशिश करें कि बच्चों को प्यार से समझाएं। किसी बड़ी गलती पर ही उन्हें डांटे व यह समझाएं कि दोबारा वह ऐसी गलती ना करें।
3- बच्चों को स्वयं प्रयास करने दें-
बच्चों को सब कुछ बना बनाया ही ना पारोसें यानी कि जो काम बच्चा स्वयं कर सकता है उसे ही करने दें। इससे वह जिम्मेदार बनेंगे। छोटी-छोटी जिम्मेदारियां को पूरा करने पर बच्चों को रिवॉर्ड दें। इससे वह पूरे मन से अपने कार्यों को पूरा करेगा, आवश्यकता अनुसार उन्हें गाइड करें लेकिन कार्य स्वयं करने दें ऐसा करने से उनका सेल्फ कॉन्फिडेंस डेवलप होगा।
4- बच्चे की प्रशंसा करें-
यदि आपका बच्चा कुछ अच्छा कार्य करता है तो उसकी प्रशंसा करने में कमी ना करें। प्रशंसा करने से बच्चों का मनोबल बढ़ता है इसलिए वह अन्य अच्छे कार्य भी करने का प्रयास करते हैं। क्लास में अच्छे नंबर लाने या किसी प्रतियोगिता में सफल होने पर उन्हें रिवॉर्ड अवश्य दें। यह उनके लिए प्रेरणादाई होता है।
आजकल पेरेंट्स खुद के वर्क में काफी बिजी होते हैं। बच्चा अधिकतर टाइम अपने स्कूल में बिताता है और बचा हुआ टाइम भी टीवी या खेल में बिता देता है। आजकल बच्चे अपने पेरेंट्स के साथ ज्यादा वक्त नहीं बिता पाते और अपने मन की बातें पेरेंट्स से शेयर नहीं कर पाते हैं। इससे बच्चे और पेरेंट्स में एक दूरी पैदा हो जाती है, जिससे वह इरिटेटेड रहते हैं। पेरेंट्स को अपने बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए। यह उनका सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक है।
(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता।)
