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किताब कैफे: जॉब में प्रोडक्टिविटी बढ़ानी है तो जरूर पढ़ें ये 5 किताबें, साथ में फ्री मिलेगा मोटिवेशन

Best Books to Boost Productivity: अगर आप अपनी जॉब में बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो ये पांच किताबें आपकी रीडिंग लिस्ट में जरूर होनी चाहिए

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Kitaab Cafe: हर नौकरी करने वाले इंसान को जरूर पढ़नी चाहिए ये 5 किताबें

Best Books to Boost Productivity: प्रोफेशनल लाइफ में जितना जरूरी मेहनत करना है, सही दिशा में काम करना भी उतना ही जरूरी है। बहुत से लोग ये महसूस करते हैं कि पूरा समय देने के बाद भी अपना सौ प्रतिशत नहीं दे पा रहे हैं। वो हमेशा अपनी प्रोडक्टिविटी को लेकर तनाव में रहते हैं। ऐसे में कुछ बेहतरीन किताबें आपकी सोच, काम करने के तरीके और समय के इस्तेमाल को पूरी तरह बदल सकती हैं।

ये किताबें आपको मोटिवेट करने के साथ ही ऐसे व्यावहारिक तरीके भी बताती हैं जिन्हें अपनी नौकरी में आसानी से अपनाया जा सकता है। अगर आप अपनी जॉब में बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो ये पांच किताबें आपकी रीडिंग लिस्ट में जरूर होनी चाहिए:

1. एटॉमिक हैबिट्स (जेम्स क्लियर)

अगर प्रोडक्टिविटी पर सिर्फ एक किताब पढ़नी हो, तो ज्यादातर लोग Atomic Habits की सलाह देते हैं। जेम्स क्लियर बताते हैं कि बड़ी सफलता किसी एक बड़े बदलाव से नहीं, रोज की छोटी-छोटी आदतों से बनती है।

किताब सिखाती है कि अच्छी आदतें कैसे बनाई जाएं, बुरी आदतों से कैसे छुटकारा पाया जाए और छोटे बदलावों के जरिए लंबे समय में बड़े परिणाम कैसे हासिल किए जा सकते हैं। ऑफिस में समय पर काम पूरा करने और लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए यह किताब बेहद उपयोगी मानी जाती है।

2. डीप वर्क (कैल न्यूपोर्ट)

अगर काम करते समय आपका ध्यान बार-बार मोबाइल, ईमेल या सोशल मीडिया की वजह से भटक जाता है, तो यह किचाब आपके लिए बेस्ट है।

कैल न्यूपोर्ट बताते हैं कि बिना किसी व्यवधान के गहराई से काम करना आज के समय की सबसे जरूरी प्रोफेशनल स्किल है। किताब में फोकस बढ़ाने, समय की बेहतर प्लानिंग करने और कम समय में ज्यादा प्रोडक्टिव काम करने के कई व्यावहारिक तरीके दिए गए हैं।

3. द सेवेन हैबिट्स ऑफ हाइली इफेक्टिव पीपल (स्टीफन आर. कोवी)

यह किताब पिछले कई दशकों से दुनिया की सबसे लोकप्रिय सेल्फ-डेवलपमेंट पुस्तकों में शामिल है। स्टीफन कोवी बताते हैं कि सफल लोग किन सात आदतों को अपनाते हैं। इनमें प्राथमिकताएं तय करना, जिम्मेदारी लेना, दूसरों के साथ बेहतर तालमेल बनाना और दीर्घकालिक सोच विकसित करना शामिल है। यह किताब ऑफिस के साथ ही व्यक्तिगत जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करती है।

4. गेटिंग थिंग्स डन (डेविड एलन)

अगर आपके पास हमेशा कामों की लंबी सूची रहती है और अकसर कुछ न कुछ छूट जाता है, तो Getting Things Done जरूर पढ़ें। किताब सिखाती है कि टास्क को कैसे व्यवस्थित करें, प्राथमिकता कैसे तय करें और बिना तनाव के ज्यादा काम कैसे पूरे करें।

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5. एजेंशियलिज्म (ग्रेग मैकक्यून)

हर काम जरूरी नहीं होता। यही बात Essentialism की सबसे बड़ी सीख है। ग्रेग मैकक्यून बताते हैं कि ज्यादा काम करने से ज्यादा जरूरी है सही काम करना। किताब आपको 'ना' कहना, गैर-जरूरी कामों से दूरी बनाना और अपनी ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण कामों पर केंद्रित करना सिखाती है।

सिर्फ किताब पढ़ना नहीं, उसे अपनाना भी जरूरी

इन सभी किताबों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें ऐसे व्यावहारिक तरीके बताए गए हैं जिन्हें आप अगले ही दिन अपनी नौकरी में लागू कर सकते हैं। चाहे सुबह की बेहतर दिनचर्या बनानी हो, समय का सही इस्तेमाल करना हो या काम के दौरान फोकस बढ़ाना हो, ये किताबें हर स्तर पर आपकी मदद कर सकती हैं।

आज नई स्किल सीखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाना। अगर आप भी अपने करियर में आगे बढ़ना चाहते हैं, बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं और कम तनाव में ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करना चाहते हैं, तो इन पांच किताबों को अपनी लाइब्रेरी में शामिल कर लें।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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