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Psychology: कुछ लोग हर उंगली में अंगुठी क्यों पहने रहते हैं, जानें क्या कहता है मनोविज्ञान

Psychology of Rings: मनोविज्ञान कहता है कि कई लोगों के लिए अंगूठियां केवल सजने-संवरने का साधन नहीं होतीं। वे रिश्तों की याद, जीवन के खास पड़ाव, आत्मविश्वास और अपनी पहचान का प्रतीक बन जाती हैं।

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क्या आप भी हर उंगली में पहनते हैं अंगूठियां? (AI Image)

Psychology of Rings: कुछ लोग सिर्फ एक अंगूठी पहनते हैं, जबकि कुछ की लगभग हर उंगली में अलग-अलग अंगूठियां नजर आती हैं। मनोविज्ञान इसे उनकी यादों, रिश्तों और पहचान का हिस्से से जुड़ा बनाता है। हाल ही में सामने आई साइकोलॉजिकल रिसर्च की मानें तो अगर कोई व्यक्ति हमेशा अपनी पसंदीदा अंगूठियां पहने रहता है, तो इसके पीछे भावनात्मक जुड़ाव भी हो सकता है। आइए जानते हैं इसके पीछे के पांच बड़े कारण:

हर अंगूठी से जुड़ी हो सकती है कोई खास याद

कई लोगों की अंगूठियां किसी खास मौके की निशानी होती हैं। यह दादी का दिया हुआ तोहफा हो सकता है, शादी या सगाई की अंगूठी, किसी दोस्त की याद या फिर किसी खास सफर से खरीदा गया तोहफा।

मनोविज्ञान के अनुसार, ऐसी चीजें इंसान की यादों को संजोकर रखने का काम करती हैं। हर बार अंगूठी पर नजर पड़ने से उससे जुड़ा अनुभव भी ताजा हो जाता है।

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अंगूठियां बन जाती हैं पहचान का हिस्सा

कुछ लोग सालों तक एक ही अंगूठी पहनते हैं। धीरे-धीरे वह उनकी पर्सनैलिटी का हिस्सा बन जाती है। जिस तरह किसी की पहचान उसके चश्मे, घड़ी या खास हेयरस्टाइल से जुड़ जाती है, उसी तरह अंगूठी भी उसकी व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बन सकती है।

विशेषज्ञ इसे एक्सटेंडेड सेल्फ की अवधारणा से जोड़ते हैं, जिसमें व्यक्ति अपनी कुछ प्रिय वस्तुओं को अपनी पहचान का विस्तार मानने लगता है।

इमोशनल सेफ्टी का एहसास

तनाव या अनिश्चितता के समय कई लोग अनजाने में अपनी अंगूठी को छूते या घुमाते रहते हैं। यह एक तरह का आत्म-सांत्वना देने वाला व्यवहार होता है।

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि जिन चीजों से हमारा भावनात्मक जुड़ाव होता है, वे हमें मानसिक रूप से सुरक्षित और सहज महसूस कराने में मदद कर सकती हैं। यही वजह है कि कुछ लोग बिना अपनी पसंदीदा अंगूठी के घर से निकलना पसंद नहीं करते।

बिना बोले कहने का तरीका

हर व्यक्ति खुद को अलग तरीके से व्यक्त करता है। किसी को कपड़ों का शौक होता है, कोई टैटू बनवाता है और कुछ लोग अंगूठियों के जरिए अपनी पसंद, विचार और जीवन के अनुभवों को व्यक्त करते हैं।

अगर किसी ने अलग-अलग डिजाइन या खास महत्व वाली कई अंगूठियां पहन रखी हैं, तो जरूरी नहीं कि वह ध्यान आकर्षित करना चाहता हो।

आदत और अपनापन

मनोविज्ञान में मेयर एक्सपोजर इफेक्ट (Mere Exposure Effect) नाम का एक सिद्धांत बताता है कि जिन चीजों के साथ हम लंबे समय तक रहते हैं, उनसे अपनापन बढ़ जाता है।

अगर कोई व्यक्ति रोज एक जैसी अंगूठियां पहनता है, तो समय के साथ उनका पहनना उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है। ऐसे में बिना अंगूठी के उसे कुछ अधूरा या अजीब महसूस हो सकता है।

वैसे ये जरूरी नहीं कि हर किसी पर ये बातें समान रूप से लागू हों। कुछ लोग सिर्फ फैशन के लिए भी अंगूठियां पहनते हैं और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। वहीं मनोविज्ञान यह जरूर बताता है कि कई लोगों के लिए अंगूठियां केवल सजने-संवरने का साधन नहीं होतीं। वे रिश्तों की याद, जीवन के खास पड़ाव, आत्मविश्वास और अपनी पहचान का प्रतीक बन जाती हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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