वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौता (MoU) लागू नहीं करने के फैसले को खारिज किए जाने पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि उन्हें ईरान के इस कदम से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। अमेरिकी टीवी चैनल से टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने ये प्रतिक्रिया दी।
टेलीफोनिक इंटरव्यू में जब उनसे ईरान के उस फैसले पर सवाल पूछा गया,जिसमें तेहरान ने पिछले महीने हुए अंतरिम समझौते का पालन नहीं करने की घोषणा की थी। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि मुझे इसकी बिल्कुल परवाह नहीं है कि वे क्या कर रहे हैं। मौजूदा संघर्ष में मेरा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
ईरान ने किया एमओयू से पीछे हटने का किया ऐलान
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है। जिसके चलते तेहरान अब 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) को लागू करने के लिए खुद को बाध्य नहीं मानता। यह समझौता "प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता" के सिद्धांत पर आधारित था और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान का रुख बदल गया है।बघाई ने यह भी दावा किया कि ईरान ने केवल आत्मरक्षा में कार्रवाई की है और उसके हमले केवल अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सैन्य उपकरणों तक सीमित रहे। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर नागरिक इलाकों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए इसे युद्ध अपराध बताया।
अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ा
इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद ईरान से जुड़े ठिकानों पर एक और सैन्य अभियान चलाया। अमेरिका का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
वहीं,ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने खुज़ेस्तान प्रांत के अहवाज़ क्षेत्र में एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। हालांकि,इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि समझौते का उल्लंघन यह दिखाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भरोसेमंद नहीं हैं।
