जब 169 साल पहले आज के ही दिन देश में पहली बार हुई थी 'हिंदू विधवा' की शादी
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Dec 7, 2025, 06:01 AM IST
इस विवाह के बाद बंगाल में हंगामा मच गया। रूढ़िवादी लोग विद्यासागर के विरोध में उतर आए। उनके घर पर पत्थर फेंके गए। लेकिन दूसरी तरफ राजा दक्षिणारंजन मुखर्जी, देवेंद्रनाथ टैगोर जैसे बड़े लोग समर्थन में उतरे। धीरे-धीरे विरोध शांत हुआ और विधवा पुनर्विवाह को सामाजिक स्वीकृति मिलती गई।
7 दिसंबर 1856 को देश में हुई थी पहली हिंदू विधवा की शादी (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pexels)
Hindu Widow Remarriage: आज 7 दिसंबर है। साल 1856 में आज की ही तारीख पर कोलकाता के एक साधारण घर में एक ऐसी घटना हुई जिसने भारतीय समाज की सैकड़ों साल पुरानी रूढ़ियों को चुनौती दी। 11 साल की ईश्वरचंद्र विद्यासागर की पहल पर 10 साल की विधवा कालिमती ने श्रीचंद्र विद्यारत्न से हिंदू रीति-रिवाज से दूसरा विवाह किया। यह भारत में विधवा पुनर्विवाह का पहला दर्ज इतिहास है जिसे कानून और समाज दोनों ने स्वीकार किया।
उस दौर की काली सच्चाई
19वीं सदी के भारत में विधवा का जीवन नरक से बदतर था। 10-12 साल की उम्र में ही बाल-विवाह हो जाता था और पति की मौत के बाद विधवा को सिर मुंडवाना, सफेद साड़ी पहनना और जीवनभर उपवास-तप करना पड़ता था। सती प्रथा 1829 में ही बंद हो चुकी थी, लेकिन उसके बाद भी समाज में विधवाओं का जीते जी मरना जारी था।
विद्यासागर का क्रांतिकारी संघर्ष
ईश्वरचंद्र विद्यासागर उस दौर के बहुत बड़े सुधारक थे। उन्होंने संस्कृत ग्रंथों में खोजबीन की और पाया कि पराशर संहिता में विधवा-पुनर्विवाह का स्पष्ट उल्लेख है। उन्होंने हिंदू विधवा पुनर्विवाह के लिए खूब संघर्ष किया। लोगों को एकजुट किया, विरोध झेला, ब्रिटिश सरकार से लॉबिंग की और आखिरकार 26 जुलाई 1856 को हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पास हुआ। लेकिन कानून बनना एक बात थी, उसे अमल में लाना दूसरी।
वह ऐतिहासिक विवाह
कानून बनने के सिर्फ पांच महीने बाद विद्यासागर ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने कालिमती (जो अपने पहले पति को खो चुकी थीं) और श्रीश्रीचंद्र विद्यारत्न को तैयार किया। 7 दिसंबर 1856 को कोलकाता के 24 सुकिया स्ट्रीट स्थित उनके घर पर सादे हिंदू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ। विद्यासागर स्वयं ने कन्यादान किया। दुल्हन को खुद के हाथ से बुनी साड़ी गिफ्ट की। यह पहला मौका था जब किसी हिंदू विधवा का विवाह वैदिक मंत्रों के साथ हुआ जिसे कानूनी मान्यता मिली।
समाज का विरोध और फिर स्वीकृति
इस विवाह के बाद बंगाल में हंगामा मच गया। रूढ़िवादी लोग विद्यासागर के विरोध में उतर आए। उनके घर पर पत्थर फेंके गए। लेकिन दूसरी तरफ राजा दक्षिणारंजन मुखर्जी, देवेंद्रनाथ टैगोर जैसे बड़े लोग समर्थन में उतरे। धीरे-धीरे विरोध शांत हुआ और विधवा पुनर्विवाह को सामाजिक स्वीकृति मिलती गई।
नए साल 2026 की ढेरों शुभकामनाएं। हमारे साथ देखें नए साल के खास बधाई संदेश, नए साल के संस्कृत शुभेच्छा संदेश, घर के बड़ों को हैपी न्यू ईयर कैसे कहें, न्यू ईयर विशेज फॉर हस्बैंड, वाइफ, बॉस, लव, नए साल के मोटिवेशनल बधाई संदेश, नए साल की देशभक्ति भरी विशेज। पढ़ें हैपी न्यू ईयर का जवाब कैसे दें। साथ ही देखें आज का राशिफल