Who Introduce Discount Offer: हम में से शायद ही कोई ऐसा हो जिसे शॉपिंग का शौक का ना हो। अगर शॉपिंग पर डिस्काउंट मिले तो फिर क्या ही कहने। हर किसी को डिस्काउंट पर चीजें खरीदना अच्छा लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर शॉपिंग पर डिस्काउंट की शुरुआत कैसे हुई थी? किसने सबसे पहले बाजार में चीजों पर डिस्काउंट देना शुरू किया? अगर आपके मन में भी ये सवाल हैं तो बता दें कि चीजों पर डिस्काउंट देने की शुरुआत एक ऐसे लड़के ने की थी जो कभी साइकिल से घूम-घूम कर लोगों के घरों तक अखबार पहुंचाता था। इस लड़के का नाम था सैम वॉल्टन। आज दुनिया सैम वॉल्टन को वॉलमर्ट के फाउंडर के तौर पर जानती है।
गरीबी से शुरू की यात्रा
सैम वॉल्टन का जन्म 1918 में अमेरिका के एक छोटे से कस्बे में हुआ था। महामंदी के दौर में उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। बचपन से ही सैम ने अखबार बांटने, दूध बेचने और खेतों में काम करके पैसे कमाने शुरू कर दिए। उन्होंने अर्थशास्त्र की डिग्री ली और दूसरे विश्व युद्ध में सेना में सेवा की। युद्ध के बाद उन्होंने जे.सी. पेनी कंपनी में नौकरी करके रिटेल का बुनियादी ज्ञान हासिल किया।

सैम वॉल्टन (Photo: Reuters)
छोटे शहरों में बड़ा सपना
1950 के दशक में सैम ने अपनी पत्नी और ससुर की मदद से एक छोटा सा स्टोर खरीदा। उस समय बड़े रिटेलर सिर्फ महानगरों पर ध्यान देते थे। लेकिन सैम ने उल्टा रास्ता चुना। उन्होंने छोटे-छोटे शहरों और कस्बों को लक्ष्य बनाया, जहां लोग अच्छा सामान सस्ते दामों पर खरीदना चाहते थे।
कम कीमत, ज्यादा ग्राहक का क्रांतिकारी आइडिया
1962 में सैम ने अपना पहला वॉलमार्ट स्टोर खोला। उन्होंने अपने स्टोर की खासियत Everyday Low Price (हर दिन कम कीमत) को बनाया। उन्होंने बिचौलियों को हटाकर सीधे कंपनियों से थोक में माल खरीदना शुरू किया। कम मुनाफे पर ज्यादा मात्रा में बिक्री का मॉडल अपनाया। इससे ग्राहक बार-बार स्टोर आने लगे।
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सस्ता बेचकर ज्यादा कमाना
सैम वॉल्टन का मानना था कि अगर किसी प्रोडक्ट को कम मुनाफे पर बेचा जाए, तो उसकी बिक्री ज्यादा होगी और कुल कमाई बढ़ेगी। उनके बिजनेस मॉडल का सिद्धांत साफ था - कम कीमत, ज्यादा ग्राहक। वॉलमार्ट की सफलता की इबारत इसी सोच की बुनियाद से लिखी गई। आज वॉलमार्ट दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी है।

वॉलमार्ट (Photo: iStock)
कर्मचारियों को बनाया हिस्सेदार
सैम वॉल्टन अपने कर्मचारियों को एम्प्लॉयी नहीं एसोसिएट्स कहते थे। उन्होंने उन्हें कंपनी के मुनाफे में हिस्सा दिया, जिससे कर्मचारी पूरे मन से काम करने लगे। वे खुद स्टोर पर घूमकर कर्मचारियों की सलाह सुनते और तुरंत लागू करते थे।
सप्लाई चेन और एक्सपेंस मैनेजमेंट का कमाल
सिर्फ सस्ता बेचना ही काफी नहीं था। वॉल्टन ने सप्लाई चेन को मजबूत बनाया, खर्चों को कम किया और तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे प्रोडक्ट सस्ते दाम में उपलब्ध कराना संभव हुआ।
मुनाफा कम, लेकिन बिक्री ज्यादा
उनकी रणनीति का सबसे बड़ा राज था- कम मुनाफा लेकर ज्यादा मात्रा में बिक्री करना। यानी एक प्रोडक्ट पर कम कमाई, लेकिन ज्यादा ग्राहकों के कारण कुल लाभ बढ़ जाता था। यही मॉडल आगे चलकर पूरी रिटेल इंडस्ट्री का आधार बन गया।
सैम वॉल्टन ने डिस्काउंट को महज एक ऑफर तक नहीं रखा। उन्होंने इसे बिजनेस मॉडल बना दिया। आज जो ऑफर्स, सेल और सस्ते दाम हमें हर जगह दिखते हैं, वह सब इसी सोच का नतीजा हैं। उनकी यह रणनीति न केवल ग्राहकों के लिए फायदेमंद साबित हुई, बल्कि रिटेल मार्केट को भी हमेशा के लिए बदल गई।
