Baa Baa Black Sheep History: बच्चों की दुनिया रंगों, कल्पनाओं और मासूम हंसी से भरी होती है। इनकी दुनिया में न तो किसी चिंता का बोझ होता है और न ही किसी तरह की जटिलता। बस होता है तो एक सरल, सुकून भरा एहसास। इसी दुनिया को और भी सुंदर बनाने का काम करती हैं नर्सरी राइम्स। ये छोटे-छोटे गीत बच्चों का मनोरंजन करने के साथ ही उनके सीखने और समझने का पहला कदम भी होती हैं।
इन राइम्स में छिपी कहानियां और किरदार बच्चों को एक जादुई संसार में ले जाते हैं, जहां हर चीज जीवंत लगती है। कभी चांद मुस्कुराता है, तो कभी तारे बातें करते हैं। यही कल्पना बच्चों के मानसिक विकास का आधार होती हैं।
बहुत सी नर्सरी राइम्स हैं जो करीब सालों से बच्चों की दुनिया का हिस्सा बनी हुई हैं। ये राइम्स बच्चों के स्कूल की किताबों में भी मिलेंगी। लेकिन बच्चों के मन को मोह लेने वाली इन राइम्स में से बहुतों का इतिहास काफी डरावना है। आपको शायद यकीन ना हो लेकिन बहुत सी नर्सरी राइम्स महामारी, गुलामी और यहां तक कि किसी को जिंदा दफना देने जैसी घटनाओं से जुड़ी हैं। ऐसी ही एक पॉपुलर राइम है Ba Ba Black Sheep.
Baa Baa Black Sheep Lyrics
बा बा ब्लैक शीप में छिपे दर्द को समझने के लिए पहले इसके बोल को समझना जरूरी है। यहां देखिए बा बा ब्लैक शीप पोयम के लिरिक्स लिरिक्स:
Baa, baa, black sheep,
Have you any wool?
Yes, sir, yes, sir,
Three bags full.
One for my master,
One for my dame,
And one for the little boy
Who lives down the lane.
Baa Ba Black Sheep
पहली नजर में यह एक साधारण कविता लगती है, जिसमें भेड़ और उसकी ऊन की बात होती है। लेकिन इसके शब्दों को ध्यान से सुनेंगे तो हो सकता है कि उसमें आपको एक ना सह पाने वाले दर्द की गूंज भी सुनाई दे, जिसे उसी काली भेड़ के ऊन से बुन दिया गया हो।
बा बा ब्लैक शीप का इतिहास (Real History of Baa Baa Black Sheep)
इंटरनेट को खंगालने पर पता चलता है कि बा बा ब्लैक शीप को सबसे पहले 1731 में लिखा गया था और इसे पहली बार 1744 में नर्सरी राइम्स कलेक्शन टॉमी थम्ब्स प्रिटी सॉन्ग बुक (Tommy Thumb’s Pretty Song Book) में प्रकाशित किया गया। 1930 में आई कैथरीन एल्वेस थॉमस ने अपनी बुक द रियल पर्सोनेजेज़ ऑफ मदर गूज (The Real Personages of Mother Goose.) में इस कविता के इतिहास के बारे में विस्तार से लिखा।
द रियल पर्सोनेजेज़ ऑफ मदर गूज के मुताबिक कविता 13वीं सदी के इंग्लैंड से जुड़ी है। तब इंगलैंड में किंग एडवर्ड I का शासन था। उस समय ऊन देश का सबसे कीमती निर्यात था और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता था। वह ऐसा दौर था जब ऊन पर भारी टैक्स लगाया गया था, जिससे यह तय होता था कि उससे होने वाली कमाई कैसे बांटी जाएगी।
किंग एडवर्ड 1 का द ग्रेट वूल टैक्स
किंग एडवर्ड I का फरमान था कि जो किसान जितना भी ऊन बनाएंगे उनके तीन हिस्से होंगे। एक हिस्सा राजा (क्राउन) को, दूसरा चर्च को और जो बचता था, वह उस किसान को मिलेगा जिसने उसे पैदा किया था। इसे 'ग्रेट वूल टैक्स' का नाम दिया गया था। इस राइम में जो लाइन है थ्री बैग्स फुल वह इसी व्यवस्था को बयां करती है। मास्टर और डेम जैसे शब्द सत्ता और विशेषाधिकार का प्रतीक हैं तो वहीं लिटिल बॉय हू लिव्स डाउन द लेन उस किसान के लिए है जो इस कठोर सामाजिक ढांचे के सबसे निचले स्तर पर होता है। कुल मिलाकर यह राइम उस मजबूरी और तकलीफ की तरफ इशारा करती है जहां मेहनत करने वाले को सबसे कम हिस्सा मिलता था।
अशुभ मानी जाती थी Black Sheep
इस नर्सरी राइम में ब्लैक शीप का जिक्र भी अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। मध्यकालीन इंग्लैंड में काली भेड़ किसानों के दुर्भाग्य की निशानी हुआ करती थी। दरअसल तब सफेद ऊन के उलट काले रंग के ऊन को रंगा नहीं जा सकता था, इसलिए उसकी कीमत कम होती थी। काली भेड़ से ऊन निकालने वाले किसानों को उतना फायदा नहीं मिलता जितना दूसरे रंग की भेड़ों से मिलता। इस कारण काली भेड़ को कम उपयोगी और कभी-कभी अशुभ भी माना जाने लगा था।
क्यों अशुभ मानी जाती थी काली भेड़ ( Photo: Freepik)
कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि ऐसी नर्सरी राइम्स आम लोगों के विचारों को सुरक्षित तरीके से व्यक्त करने का माध्यम थीं। उस समय सत्ता की खुलकर आलोचना करना खतरनाक हो सकता था, इसलिए ये गीत समाज में असमानता, शोषण और किसानों के दर्द जैसे मुद्दों को परोक्ष रूप से सामने लाते थे।
समय के साथ, जब यह कविता पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ी, तो इसके तीखे अर्थ धीरे-धीरे नरम पड़ गए। देखते-देखते यब बच्चों का गीत बन गया। आज दुनियाभर के करोडो़ं बच्चे इस राइम को सुनते और गाते हैं। यह राइम बच्चों की मासूम दुनिया का प्यारा सा हिस्सा बन चुका है। लेकिन एक बात तो यह है कि इसका स्वरूप चाहे जितना भी बदल जाए, इसके शब्दों को ध्यान से सुनेंगे तो किसानों की दर्द भरी आह को जरूर महसूस करेंगे।
