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हादसा शायरी: कोई कॉलम नहीं है हादसों पर, बचा कर आज का अख़बार रखना.., पढ़ें हादसे पर 15 मशहूर शेर

Haadsa Shayari in Hindi: हादसे पर गढ़े गए ये शेर हमें सिखाते हैं कि हादसा सिर्फ टूटने का नाम नहीं है। यह ताकत है हमारे फिर से उठ खड़े होने का भी।

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हादसा शायरी, हादसे पर शायरी

Haadsa Shayari in Hindi: 12 जून को अहमदाबाद में हुए हवाई हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में ना जाने कितने ही परिवार उजड़ गए। कहने को तो कोई भी हादसा केवल एक पल की बात होता है, पर उसकी गूंज अक्सर उम्रभर सुनाई देती है। यह अचानक आता है। बिना दस्तक, बिना इजाज़त। कई बार यह हादसे ताउम्र नासूर की तरह चुभते हैं। हादसे कभी हमें तोड़ कर रख देते हैं तो वहीं कई बार हादसे हमें बहुत कुछ सिखा कर भी जाते हैं। इसी हादसे पर कई शायरों ने बहुत से खूबसूरत शेर लिखे हैं। आइए पढ़ते हैं हादसे पर लिखे चंद मशहूर शेर:

1. हज़ारों हादसे होते हैं लोगों रोज़ सड़कों पर

घरों से मौत के डर से निकलना छोड़ दोगे क्या

- अजय अज्ञात

2. कोई कॉलम नहीं है हादसों पर

बचा कर आज का अख़बार रखना

- अब्दुस्समद ’तपिश’

3. हादसों पर फ़िदा हो गई

ज़िंदगी क्या से क्या हो गई

- उर्मिलेश

4. ज़िंदगी हादसे के सिवा कुछ नहीं

हादसे पर मगर सोचता कौन है

- सलीम मुहीउद्दीन

5. बस्तियों में होने को हादसे भी होते हैं

पत्थरों की ज़द पर कुछ आईने भी होते हैं

- ग़ुलाम रब्बानी ताबां

6. हादसे पर हादसे ही हो रहे हैं क्या ख़बर

आसमां वाले को मेरी बेबसी अच्छी लगी

- साहिर शेवी

7. यहां हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है

खिलौना है जो मिट्टी का फ़ना होने से डरता है

- राजेश रेड्डी

8. सर-ए-राह मिल के बिछड़ गए था बस एक पल का वो हादसा

मिरे सेहन-ए-दिल में मुक़ीम है वही एक लम्हा अज़ाब का

- अंजुम इरफ़ानी

9. हादसे ऐसे भी होते हैं यहां पर

लूटने वालों को लूटा है किसी ने

- राघवेंद्र द्विवेदी

10. न सोचो तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ के मोड़ पर रुक कर

क़दम बढ़ाओ कि ये हादसा ज़रूरी है

- मुसव्विर सब्ज़वारी

11. वो हादसे भी दहर में हम पर गुज़र गए

जीने की आरज़ू में कई बार मर गए

- उनवान चिश्ती

12. किसी भी हादसे पर उस की आंखें नम नहीं होतीं

इसी हालत को कहते हैं मियां एहसास मर जाना

- शायान क़ुरैशी

13. कोई इक हादिसा हो गर करें हम ज़िक्र भी उस का

गुज़रते हैं यहां तो हादसे पर हादसे दिल पर

- अनीस अहमद अनीस

14. अपनी ख़ुद-कर्दगी दिखाने को

हादसों पर ही इंहिसार न कर

- प्रेम नारायण सक्सेना राज़

15. ज़मीं पैरों से कितनी बार इक दिन में निकलती है

मैं ऐसे हादसों पर दिल मगर छोटा नहीं करता

- जमाल एहसानी

उम्मीद करते हैं हादसे पर लिखे ये शेर आपको पसंद आए होंगे। हादसे पर गढ़े गए ये शेर हमें सिखाते हैं कि हादसा सिर्फ टूटने का नाम नहीं है। यह ताकत है हमारे फिर से उठ खड़े होने का भी।

Suneet Singh
सुनीत सिंह author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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