लाइफस्टाइल

हर सोमवार पढ़ लें गीता का यह एक श्लोक, काम बोझ नहीं लगेगा और मन भी थोड़ा हल्का महसूस होगा

Monday Motivation: हर सोमवार अगर काम का दबाव और रिजल्ट की चिंता परेशान करती है तो भगवद्गीता का यह एक श्लोक आपकी सोच बदल सकता है। जानिए कर्मण्येवाधिकारस्ते का आसान अर्थ और आधुनिक जीवन में इसकी सीख।

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Monday Motivation: सोमवार आते ही हर किसी की जिंदगी एक जैसी नहीं होती, लेकिन एक चीज जरूर कॉमन होती है - दिमाग में चल रही लंबी-सी टू-डू लिस्ट। किसी की सुबह मीटिंग से शुरू होती है, किसी की स्कूल बस से। कोई लैपटॉप खोलते ही मेल्स में उलझ जाता है, तो कोई पूरे वीकेंड के बाद फिर उसी रूटीन में लौटने की कोशिश करता है। ऊपर से सोशल मीडिया ऐसा माहौल बना देता है कि लगता है दुनिया के बाकी लोग तो हर सोमवार नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं और बस हम ही पीछे छूट गए हैं।

अगर आपको भी सोमवार थोड़ा भारी लगता है, तो शायद आपको मोटिवेशनल रील्स स्क्रॉल करने की नहीं, गीता का एक श्लोक पढ़ने की जरूरत है।हजारों साल पहले कही गई यह बात आज भी उतनी ही सच लगती है, जितनी कुरुक्षेत्र के मैदान में रही होगी।

कर्म पर ध्यान दीजिए, नतीजों पर नहीं

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥

इसका अर्थ बहुत सीधा है कि आपका अधिकार सिर्फ अपने कर्म पर है, उसके फल पर नहीं। इसलिए परिणाम की चिंता में अपने कर्म से मुंह मत मोड़िए।

पहली बार पढ़ने पर लगता है कि इसमें नया क्या है? लेकिन अगर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी पर नजर डालें तो समझ आएगा कि हमारी आधी बेचैनी काम की वजह से नहीं, बल्कि उसके नतीजे की वजह से होती है।

रिपोर्ट भेज दी - अब बॉस क्या कहेंगे? पोस्ट डाल दी- कितने लाइक्स आए? इंटरव्यू दे दिया- कॉल कब आएगी? इतनी मेहनत की- पहचान क्यों नहीं मिली? यानी काम खत्म होने के बाद भी हमारा दिमाग काम नहीं छोड़ता। वह रिजल्ट पकड़कर बैठ जाता है।

शायद यही Gen Z की सबसे बड़ी उलझन भी है

आज की पीढ़ी मेहनती है। इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन यह ऐसी दुनिया में बड़ी हुई है, जहां हर चीज तुरंत मिलती है। खाना दस मिनट में, कैब दो मिनट में, रील तीस सेकेंड में और जवाब भी जितना जल्दी मिले, उतना बेहतर।

ऐसे में इंतजार सबसे मुश्किल काम लगने लगता है। यही वजह है कि मेहनत करने के बाद अगर सफलता थोड़ा समय ले ले, तो कई बार खुद पर ही शक होने लगता है।

लेकिन गीता कहती है कि सफलता का समय हमेशा आपके हाथ में नहीं होगा, कोशिश का तरीका जरूर होगा। और सच कहें तो जिंदगी भी अक्सर उसी का साथ देती है, जो बिना शोर किए अपना काम करता रहता है।

हर सोमवार पूरी जिंदगी बदलने की जरूरत नहीं होती

सोमवार कोई परीक्षा नहीं है कि आज ही सब साबित करना है। जरूरी नहीं कि इस हफ्ते प्रमोशन मिल जाए। जरूरी नहीं कि आपकी बनाई हर योजना सफल हो। और यह भी जरूरी नहीं कि हर दिन आप पूरी ऊर्जा के साथ काम कर पाएं। कुछ दिन बस अपना काम ईमानदारी से पूरा कर लेना भी बड़ी उपलब्धि होती है।

अगर आज आपने अपना बेस्ट दिया, कुछ नया सीखा, किसी की मदद की या कल से थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश की, तो समझिए आपने गीता के इस श्लोक को सिर्फ पढ़ा नहीं, जीना भी शुरू कर दिया।

शायद मोटिवेशन का असली मतलब यही है

हम अक्सर मोटिवेशन को ऊंची आवाज वाले भाषणों या बड़े-बड़े कोट्स में ढूंढ़ते हैं। लेकिन कई बार सबसे गहरी सीख बहुत शांत होती है। वह आपको दौड़ने के लिए नहीं कहती- बस इतना कहती है कि चलते रहिए।

इस सोमवार खुद से सिर्फ एक बात कहिए - मुझे अपना काम पूरी ईमानदारी से करना है। बाकी जो मेरे हाथ में नहीं है, उसकी चिंता करके खुद को परेशान नहीं करना है।

यकीन मानिए, अगर यह एक बात याद रह गई, तो शायद सोमवार उतना मुश्किल नहीं लगेगा। और हो सकता है कि पूरी जिंदगी भी थोड़ी आसान लगने लगे।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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