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दास्तान-ए-उस्ताद: जब भारत रत्न मिलने के बाद फटी लुंगी में इंटरव्यू देने लगे बिस्मिल्लाह खां, टोकने पर मिला ऐसा जवाब

साल 2001 में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को भारत सरकार ने ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया था। वह ऐसा दौर था जब सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया में उनकी कलाकारी की लोग मिसाल देते थे। उन्हीं दिनों एक टीवी चैनल उनका इंटरव्यू करने उनके घर पहुंचा। बिस्मिल्लाह खां जिस फटी लुंगी में बैठे थे उसी में इंटरव्यू देने लगे।

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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां (फोटो सोर्स: PTI)

Ustad Bismillah Khan: हिंदुस्तान की सरजमीं ने दुनिया को एक से बढ़कर एक कलाकारों से नवाजा है। ऐसा ही एक नाम है उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का। बिस्मिल्लाह खां का नाम आते ही कानों में शहनाई गूंजने लगती है। बिस्मिल्लाह खां यूं तो बिहार के डुमरांव में जन्मे थे लेकिन उनकी जिंदगी बनारस की गलियों में बीती। गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल रहे बिस्मिल्लाह खां शहनाई के ऐसे फनकार थे कि जिनकी सांसें भी सुरों में डूबी लगती थीं। बिस्मिल्लाह खां शहनाई बजाने को ईश्वर की इबादत मानते थे। उन्हें शहनाई वादन के लिए पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण से लेकर भारत रत्न तक जैसे नागरिक सम्मान मिले थे।

बिस्मिल्लाह खां के रोचक किस्से

बिस्मिल्लाह खां जितने बड़े कलाकार थे उतने ही ज्यादा जमीन से जुड़े भी थे। उनकी सादगी पसंद जीवनशैली के बहुत से किस्से बनारस की गलियों में तैर रहे हैं। ऐसा ही एक किस्सा है जब भारत रत्न जैसा भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने के बाद बिस्मिल्लाह खां फटी लुंगी में एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देने लगे। उनकी शिष्या ने जब इस बाबत उन्हें टोका तो ऐसा गुरु मंत्र मिला जो किसी की भी जिंदगी बदल सकता है।

भारत रत्न और फटी लुंगी में इंटरव्यू

साल 2001 में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को भारत सरकार ने ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया था। वह ऐसा दौर था जब सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया में उनकी कलाकारी की लोग मिसाल देते थे। उन्हीं दिनों एक टीवी चैनल उनका इंटरव्यू करने उनके घर पहुंचा। बिस्मिल्लाह खां जिस फटी लुंगी में बैठे थे उसी में इंटरव्यू देने लगे। इस पर उनकी शिष्या ने टोका कि उस्ताद आप ऐसा क्यों कर रहे हैं, आपको तो भारत रत्न मिल चुका है, आप फटी लुंगी पहनकर इंटरव्यू क्यों दे रहे हैं? इससे क्या संदेश जाएगा?

शिष्या के इस सवाल पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने प्यार से समझाते हुए कहा- पगली मुझे भारत रत्न शहनाई बजाने पर मिला है, फटी हुई लुंगी से उसका क्या ताल्लुक। तू कह रही है तो लुंगी बदल लेता हूं। खुदा से हमेशा यही प्रार्थना करना कि तुम्हें वह हमेशा सच्चा सुर बख्शे। कोई फटा हुआ सुर न बख्शे। अगर खुदा ने एक गलत सुर बख्श दी तो तुम्हारी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। लुंगी का क्या है, आज फट है कल सिल जाएगी।

बिस्मिल्लाह खां ने ये सबक जो अपनी शिष्या को दिया वो बताता है कि इंसान की कद्र उसके काम से होती है, कपड़ों से नहीं। अगर आप बाहरी तौर पर कितना भी सज धज लें, लेकिन अंदर से वैसे ही मैले कुचैले हैं तो आपको मिलने वाला सम्मान किसी लायक नहीं रहता। बिस्मिल्लाह खां से जुड़े ऐसे कई रोचक किस्से हैं। अगले अंक में किसी और किस्से को समझने की कोशिश करेंगे।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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