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Food Divorce: कपल्स में बढ़ रहा 'फूड डिवोर्स' का चलन, जानें साथ रहते हुए भी क्यों अलग-अलग खा रहे खाना

Food Divorce: फूड डिवोर्स का मतलब एक ही छत के नीचे रह रहे जोड़ों का अलग-अलग सामान खरीदना, अलग खाना बनाना और अलग-अलग समय पर खाना खाना है।

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जानिए क्या होता है फूड डिवोर्स, क्यों साथ रहकर भी अलग-अलग खाना खा रहे कपल्स (Photo: iStock)

पहले लोग साथ बैठकर खाना खाते थे। डाइनिंग टेबल पर दिनभर की बातें होती थीं, हंसी मजाक होता था। मैरिड कपल्स के लिए तो यही वक्त सबसे खास होता था। अब ये हालात काफी हद तक बदल चुके हैं। अब एक नया चलन शुरू हुआ है जिसे 'फूड डिवोर्स' कहा जा रहा है। इसका मतलब शादी या रिश्ता टूटना नहीं है, एक ही छत के नीचे रह रहे जोड़ों का अलग-अलग सामान खरीदना, अलग खाना बनाना और अलग-अलग समय पर खाना खाना है।

हुआ ये है कि फिटनेस, डाइट, ईटिंग हैबिट्स और बिजी लाइफस्टाइल के कारण कई कपल्स की खाने की आदतें एक जैसी नहीं रह गई हैं। ऐसे में कुछ लोग रोज होने वाली बहस से बचने के लिए अलग-अलग मील रूटीन अपनाने लगे हैं।

हर बार झगड़ा खाने का नहीं होता

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट्स का कहना है कि अगर खाने को लेकर बार-बार विवाद हो रहा है, तो कई बार असली समस्या खाना नहीं होती। दरअसल, एक पार्टनर को लग सकता है कि उसकी पसंद की अनदेखी हो रही है, जबकि दूसरे को महसूस हो सकता है कि उसे जज या कंट्रोल किया जा रहा है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाना सिर्फ पेट भरने का ज़रिया नहीं है। यह परिवार, बचपन की आदतों और अपनापन महसूस करने से भी जुड़ा होता है। इसलिए छोटी सी बात भी बड़ी बहस में बदल सकती है।

क्या अलग-अलग खाना रिश्ते के लिए नुकसानदायक है?

हर मामले में ऐसा नहीं है। अगर दोनों की नौकरी का समय अलग है, किसी की मेडिकल डाइट है या दोनों की खाने की पसंद बिल्कुल अलग है, तो अलग-अलग खाना एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है। हर मील को समझौता बनाना जरूरी नहीं है।

यहां एक्सपर्ट्स ये चेतावनी भी देते हैं कि असली समस्या तब शुरू होती है, जब अलग-अलग खाना धीरे-धीरे साथ बिताए समय को भी खत्म कर देता है। अगर डिनर के साथ बातचीत भी गायब हो जाए या कोई पार्टनर जानबूझकर साथ खाने से बचने लगे, तो यह इमोशनल डिस्टेंस का संकेत हो सकता है।

अलग डाइट, रिश्ता भी ऑलराइट

रिलेशनशिप एक्सपरट्स का मानना है कि एक हेल्दी रिलेशनशिप के लिए दोनों का एक जैसा खाना खाना जरूरी नहीं है। जरूरी ये है कि दोनों एक-दूसरे की पसंद का सम्मान करें और साथ रहने के छोटे-छोटे मौके बनाए रखें। इसके लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं:

- सुबह की चाय साथ पीना।

- वीकेंड पर मिलकर खाना बनाना।

- कभी-कभी बाहर साथ खाना खाना।

- डिनर के बाद साथ टहलना।

- एक-दूसरे के खाने को जज न करना।

रिलेशनशिप के लिए सबसे जरूरी क्या है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, रिश्ते की मजबूती इस बात से तय नहीं होती कि दोनों की प्लेट में एक जैसा खाना है या नहीं। असली बात यह है कि अलग पसंद होने के बावजूद दोनों एक-दूसरे को सम्मान दें, बातचीत बनाए रखें और रोज के रूटीन से कुछ पल ऐसे बचाकर रखें, जो सिर्फ उनके रिश्ते के लिए हों। तोअगर आपकी डाइट अलग है, तो यह समस्या नहीं है। समस्या तब बनती है, जब अलग प्लेटों के साथ दिलों के बीच भी दूरी बढ़ने लगे।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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