झारखंड के सरकारी 80 CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के छात्रों को पर्सनलाइज्ड एकेडमिक सपोर्ट देने के लिए राज्य भर के स्कूलों में AI-पावर्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म Prepzy.ai शुरू किया जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म राज्य के पूर्व स्वास्थ्य सचिव शिवेंदु (जो अब यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा में एसोसिएट प्रोफेसर हैं) और पूर्व शिक्षा सचिव मृदुला सिन्हा की सोच का नतीजा है। इसे सभी 80 CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के प्रिंसिपलों, वार्डन और स्कूल मैनेजरों के सामने पेश किया गया।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने एक बयान में कहा कि स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के तहत आयोजित ओरिएंटेशन प्रोग्राम में कक्षा 9 से 12 के लिए बोर्ड-रेडीनेस प्लान पर ध्यान दिया गया। एक अधिकारी ने कहा, "Prepzy.ai को शुरू करना राज्य के मॉडल सरकारी स्कूलों में AI-इनेबल्ड लर्निंग सपोर्ट लाने की एक कोशिश है। इसमें क्लासरूम टीचिंग को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा गया है, ताकि छात्र स्कूल के समय के बाद भी इसका इस्तेमाल कर सकें।
स्कूल के बाद भी जारी रहेगी पढ़ाई
इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल स्कूल के समय तक शैक्षणिक सहायता देने तक सीमित नहीं है। Prepzy.ai के जरिए छात्र स्कूल के बाद भी वीडियो लेक्चर, प्रैक्टिस सवाल और AI ट्यूटर की मदद ले सकेंगे। इससे उन्हें अपने समय के अनुसार दोहराई करने और कठिन विषयों को दोबारा समझने का अवसर मिलेगा।
एक प्लेटफॉर्म पर 75 से ज्यादा कोर्स
Prepzy.ai को कक्षा 6 से 12 तक के CBSE और NCERT पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें 75 से अधिक कोर्स, 5,200 से ज्यादा वीडियो लेक्चर और 2.5 लाख से अधिक अभ्यास प्रश्न उपलब्ध हैं। छात्रों को पांच साल से ज्यादा अवधि के बोर्ड पेपर भी मिलेंगे। इसके साथ 24x7 AI ट्यूटरिंग की सुविधा दी गई है।
अतिरिक्त हार्डवेयर की जरूरत नहीं
सरकारी स्कूलों के लिए एक खास बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म के लिए किसी अतिरिक्त हार्डवेयर या स्कूल-लेवल लाइसेंस की जरूरत नहीं है। इससे वे बिना किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत के पर्सनलाइज़्ड डिजिटल एकेडमिक सपोर्ट शुरू कर सकते हैं। ओरिएंटेशन के दौरान, स्कूल लीडर्स को दिखाया गया कि छात्र कैसे इस प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करके कॉम्पिटेंसी-बेस्ड सवालों की प्रैक्टिस कर सकते हैं, अपनी कमज़ोरियों को पहचान सकते हैं और कॉन्सेप्ट्स की समझ को बेहतर बना सकते हैं।
AI ट्यूटर देगा स्टेप-बाय-स्टेप गाइडेंस
Prepzy.ai का AI ट्यूटर छात्रों के सवालों का रियल-टाइम में जवाब देने, कॉन्सेप्ट्स को समझाने और स्टेप-बाय-स्टेप गाइडेंस देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए मॉक एग्जाम जैसी सुविधाएं
यह प्लेटफॉर्म एक ऐसे फ्रेमवर्क का इस्तेमाल करता है जो छात्रों के सीखने के तरीकों का विश्लेषण करता है, कॉन्सेप्ट से जुड़ी कमियों की पहचान करता है और खास तौर पर उनके लिए गाइडेंस देता है। इसमें इंटरैक्टिव लेसन, असेसमेंट, कस्टमाइज्ड प्रैक्टिस, CBSE-स्टाइल मॉक एग्जाम, पिछले साल के पेपर, डिजिटल नोट्स और परफॉर्मेंस ट्रैकिंग जैसी चीजें शामिल हैं। संस्थापकों ने बताया कि माता-पिता और शिक्षक खास डैशबोर्ड के जरिए छात्रों की प्रोग्रेस पर नज़र रख सकते हैं। साथ ही, पहुंच बढ़ाने के लिए गणित और विज्ञान का कंटेंट हिंदी और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
ग्रामीण छात्रों को बेहतर अवसर देने का लक्ष्य
प्लेटफॉर्म से जुड़े संस्थापकों के अनुसार, सरकारी सेवा के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि कई छात्रों की शैक्षणिक जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के बीच अंतर बना हुआ है। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के छात्रों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक मार्गदर्शन हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। Prepzy.ai के जरिए इस अंतर को कम करने की कोशिश की जा रही है, ताकि दूर-दराज के सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी बेहतर एकेडमिक गाइडेंस मिल सके।
क्या है Prepzy.ai
Prepzy.ai, ग्लोबसर्न सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का एक प्रोडक्ट है। इसे झारखंड के तीन पूर्व सिविल सेवकों - पूर्व स्वास्थ्य सचिव डॉ. शिवेंदु, पूर्व शिक्षा सचिव सिन्हा और पूर्व मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी - का समर्थन प्राप्त है। संस्थापकों का कहना है कि सरकारी सेवा के दौरान उन्हें छात्रों की उम्मीदों और उन्हें मिलने वाले एकेडमिक संसाधनों के बीच लगातार बने रहने वाले अंतर का पता चला, खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों में। शिवेंदु ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म को बनाने का मकसद यह था कि दूर-दराज के इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वैसी ही एकेडमिक गाइडेंस मिल सके, जैसी बेहतर संसाधनों वाले प्राइवेट स्कूलों के छात्रों को मिलती है।
इनपुट: PTI
