मिस सुपरनेशनल 2025 प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व आयुश्री मलिक करने वाली हैं। ये कॉम्पिटिशन इसी महीने पोलैंड में होने वाला है। दिल्ली विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान की द्वितीय वर्ष की छात्रा आयुश्री मलिक इस महीने पोलैंड में आयोजित होने जा रहे मिस सुप्रानैशनल 2025 प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनकी बातचीत में सहज आत्मविश्वास, गहराई और संवेदनशीलता झलकती है, जिनसे मिलते ही उनकी परिपक्वता और विचारशीलता का अंदाज़ा लगाना आसान हो जाता है। उनके अनुसार, शिक्षा जीवन की बुनियाद है। उन्होंने 12वीं बोर्ड में 96% अंक हासिल किए और मनोविज्ञान की पढ़ाई ने उनकी emotional intelligence को गहराई से निखारा है, जो वे मानती हैं कि केवल पर्सनल ग्रोथ ही नहीं, बल्कि पेजेंट्री की दुनिया में भी बेहद जरूरी है।

Pageantry is a field that demands emotional intelligence, says Ayushree Malik,
अब सवाल ये आता है कि आख़िर एक टॉपर छात्रा ने पेजेंट्री की ओर रुख क्यों किया? इसके जवाब में आयुश्री ने कहा- मैं इस मंच का उपयोग अपनी कहानी साझा करने के लिए करना चाहती हूं। इसमें वो मूल्य शामिल हैं जो मेरी मां और मेरे देश ने मुझे दिए हैं। पोलैंड में, मैं यही दर्शाना चाहती हूं। साथ ही, मनोविज्ञान ने मुझे सिखाया है कि मानसिक और भावनात्मक मज़बूती से हम किसी भी लक्ष्य को पा सकते हैं।
आयुश्री कहती हैं, 'सबसे पहले, पेजेंट्री सिर्फ मंच पर खड़े होकर मुस्कुराने का नाम नहीं है। यह 24x7 की प्रतिबद्धता है, बिना छुट्टी। जब हम भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो हम हर पल खुद को बेहतर बनाने में लगे रहते हैं। दूसरी बात, यह केवल शोभा या ग्लैमर नहीं है, बल्कि आत्मविकास का एक गहरा और सशक्त माध्यम है।'
आयुश्री ने फैशन इंडस्ट्री के बड़े नाम जैसे राजदीप राणावत, समंत चौहान और अर्चना कोचर के साथ काम किया है, और भविष्य में मनीष मल्होत्रा के लिए रैम्प वॉक करना उनका सपना है। वर्तमान में वa मिस सुप्रानैशनल के लिए उच्च-स्तरीय ट्रेनिंग से गुजर रही हैं, जिसमें प्रोफेशनल ग्रूमिंग से लेकर पर्सनल डेवलपमेंट तक हर पहलू शामिल है।

Ayushree will be representing India at the Miss Supranational 2025 pageant
आयुश्री मलिक ने कहा- इस यात्रा ने मुझे मेरी अपनी छिपी क्षमताओं से परिचित कराया है। यह एक 360-डिग्री परिवर्तन है — मैं खुद का सबसे बेहतर रूप बन रही हूं। यह केवल मंच के लिए नहीं है, बल्कि जीवन के लिए है। अनुशासन, सहनशीलता, मानसिक मजबूती, संप्रेषण, उच्चारण, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, हर चीज़ पर काम हो रहा है। मैं एक प्रोफेशनल साइकोलॉजिस्ट के साथ भी काम कर रही हूं ताकि मैं भीतर से मजबूत बन सकूं।”
आयुश्री की पर्सनल जर्नी सिर्फ पेजेंट्री तक सीमित नहीं है। वो ब्रेव हार्ट्स नामक सामुदायिक सेवा प्रोजेक्ट चला रही हैं, जिसकी शुरुआत एक निजी त्रासदी से हुई थी—जब वे सात साल की थीं, एक सड़क दुर्घटना में उन्होंने अपने पिता को खो दिया। आयुषी कहती हैं- उस उम्र में मैं अपने नुकसान को समझ भी नहीं पाई थी। पर जब बड़ी हुई, तो वह दर्द मेरे अंदर घर कर गया। मनोविज्ञान पढ़ते हुए मुझे समझ आया कि भावनात्मक उपचार कितना ज़रूरी है। इसीलिए ‘ब्रेव हार्ट्स’ के ज़रिए मैं ऐसा स्पेस बना रही हूं जहाँ लोग अपनी भावनाओं के बारे में खुलकर बात कर सकें, क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना अब कोई वर्जना नहीं है। यह ज़रूरत है। इस पहल के तहत, आयुषी स्थानीय NGOs के साथ मिलकर शोक परामर्श, सपोर्ट सत्र और जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करती हैं—जिससे समाज में मानसिक और भावनात्मक उपचार को प्राथमिकता दी जा सके।
आयुश्री का सपना सिर्फ ताज तक सीमित नहीं है, बल्कि वो चाहती हैं कि उनका सफर उन बच्चों के लिए आशा बने जो किसी निजी दर्द से जूझ रहे हैं। 'अगर कोई सात साल का बच्चा, जिसने कुछ खोया है, मेरी कहानी से थोड़ा भी साहस पा सके, तो मेरा सफर सार्थक हो जाएगा।'
