Ankur Warikoo Money Rules For Kids: बहुत से लोगों के लिए बच्चों को लग्जरी सुविधाएं देना ही अच्छी परवरिश है। उन्हें लगता है कि हम अपने बच्चे की हर ख्वाहिश पूरी करते हैं, और बतौर पेरेंट हमारा फर्ज भी है ये। लेकिन क्या ये सोच सही है? फेमस कंटेंट क्रिएटर, बिजनेसमैन और राइटर अंकुर वारिकू कहते हैं कि ये सरासर गलत है।
हाल ही में अंकुर वारिकू ने एक वीडियो शेयर कर बताया है कि वो अपने दो बच्चों की परवरिश कुछ ऐसे वित्तीय सिद्धांतों के साथ कर रहे हैं, जिनका मकसद बच्चों को दिखावे की बजाय आर्थिक रूप से जिम्मेदार इंसान बनाना है। अंकुर साफ कहते हैं कि हम सिर्फ अमीर दिखने के लिए पैसे खर्च नहीं करते। यही बात वो अपने बच्चों को भी सिखा रहे हैं।
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यहां दिलचस्प बात ये है कि उनकी जो सोच है व्यवहारिक अर्थशास्त्र और वित्तीय शिक्षा से जुड़े कई विशेषज्ञों के विचारों से भी मेल खाती है। आइए जानते हैं कि बच्चों को फाइनेंशियली इंटेलिजेंट बनाने के लिए क्या करते हैं अंकुर वारिकू:
अमीर दिखने से ज्यादा जरूरी है अमीर बनना
अंकुर और उनकी पत्नी रुचि वारिकू का पहला नियम है कि पैसे का इस्तेमाल दूसरों को प्रभावित करने के लिए नहीं होना चाहिए। वे बच्चों के सामने भी यही उदाहरण रखते हैं कि किसी महंगी चीज को सिर्फ इसलिए न खरीदें क्योंकि उससे लोग प्रभावित होंगे।
अमेरिकी लेखक थॉमस जे. स्टेनली और विलियम डी. डैंको अपनी चर्चित किताब द मिलेनियर नेक्स्ट डोर (The Millionaire Next Door) में लिखते हैं कि ज्यादातर वैसे लोग जो सच में अमीर हैं , वो अपनी आय से कम खर्च करते हैं और दिखावे से दूर रहते हैं। उनके अनुसार, दौलत का सबसे बड़ा राज उपभोग नहीं, बचत और निवेश की आदत है।
सबसे बड़ा निवेश आपकी सेहत है
वारिकू दंपति का दूसरा नियम है कि अगर खर्च करना ही है, तो सबसे पहले स्वास्थ्य पर करें। अच्छी डाइट, हेल्थ, फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य पर किया गया खर्च कभी बेकार नहीं जाता।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल भी कई शोधों में बता चुका है कि हेल्दी लाइफस्टाइल पर किया गया निवेश भविष्य के बड़े मेडिकल खर्चों को कम कर सकता है। यानी अच्छी सेहत भी एक तरह की वित्तीय सुरक्षा है।
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चीजों से ज्यादा अनुभव खरीदिए
उनका तीसरा सिद्धांत है कि परिवार के साथ बिताया गया समय, यात्राएं और यादगार अनुभव किसी महंगी वस्तु से ज्यादा मूल्यवान होते हैं। बहुत से शोध भी ये बताते हैं कि लोग भौतिक वस्तुओं की तुलना में अनुभवों से अधिक और लंबे समय तक खुशी महसूस करते हैं। अनुभव रिश्तों को भी मजबूत बनाते हैं।
निवेश को आदत बनाइए, इवेंट नहीं
वारिकू परिवार का चौथा नियम है कि निवेश किसी खास मौके का इंतजार नहीं करता। नियमित निवेश ही लंबे समय में संपत्ति बनाता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट मॉर्गन हाउसल अपनी बेस्टसेलर किताब द साइकोलॉजी ऑफ मनी (The Psychology of Money) में लिखते हैं कि धन बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका लगातार बने रहने वाली अच्छी आदतों की होती है, न कि केवल ऊंची आय की।
सीखने पर खर्च कभी महंगा नहीं पड़ता
अंकुर का आखिरी नियम है कि किताबें, नए स्किल्स और शिक्षा पर खर्च को खर्च नहीं, निवेश मानना चाहिए। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री गैरी बेकर ने अपनी ह्यूमन कैपिटल थ्योरी (Human Capital Theory) में बताया था कि शिक्षा और कौशल पर किया गया निवेश व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी बनता है, जिसका लाभ जीवनभर मिलता है।
बच्चों के लिए सबसे बड़ी सीख
अंकुर वारिकू इस बात पर जोर देते हैं कि बच्चों को केवल पैसे कमाना नहीं, पैसे के प्रति सही सोच विकसित करना सिखाना चाहिए। वे सम्मान, जिम्मेदारी और अपने फैसलों की जवाबदेही जैसे मूल्यों के साथ ही आर्थिक समझ को जरूरी मानते हैं। अंकुर वारिकू का मानना है कि बच्चों को महंगी चीजें देने से ज्यादा जरूरी है उन्हें यह सिखाना कि पैसा कहां, क्यों और कब खर्च करना चाहिए।
शायद यही वजह है कि वित्तीय शिक्षा का असली पाठ बैंक अकाउंट से नहीं, घर के रोजमर्रा के फैसलों से शुरू होता है। यही फैसले आगे चलकर बच्चों को केवल कमाने वाला नहीं, बल्कि समझदारी से धन संभालने वाला इंसान बनाते हैं।
