Kanpur Momos: यदि आप भी सड़कों पर मिलने वाले तीखे और चटपटे मोमोज-चटनी के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में लोगों की सेहत से सरेआम खिलवाड़ करने वाले मोमो निर्माताओं पर प्रशासन का बड़ा चाबुक चला है। शहर के रावतपुर और साकेत नगर इलाकों में भयंकर गंदगी और अस्वच्छ परिस्थितियों के बीच मोमोज और उसके साथ परोसी जाने वाली तीखी लाल चटनी तैयार की जा रही थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के सख्त निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बुधवार को एक बड़ा विशेष अभियान चलाया। इस छापेमारी के दौरान टीम ने तीन बड़ी मोमोज फैक्ट्रियों को सील कर पूरी तरह बंद करा दिया। इसके साथ ही, लगभग 115 किलोग्राम दूषित चटनी को जब्त कर नगर निगम के वेस्ट डिस्पोजल यार्ड में नष्ट करवा दिया गया।
बिना रजिस्ट्रेशन भयंकर गंदगी में होता था काम
खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय वर्मा, रजनीश कुमार राय, अनिल कुमार और सारिका सिंह की टीम ने सबसे पहले रावतपुर गांव स्थित आकाश मोमोज फैक्ट्री पर छापा मारा। यहां परिसर में मक्खियां भिनभिना रही थीं और साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं था। टीम ने यहां से 40 किलो संदिग्ध चटनी नष्ट की। इसके बाद टीम श्री बालाजी मोमोज फैक्ट्री पहुंची। यहां का नजारा और भी चौंकाने वाला था खाद्य कारोबार के लिए आवश्यक अनिवार्य खाद्य पंजीकरण (FSSAI Registration) तक नहीं था। बेहद खराब माहौल में तैयार की गई करीब 45 किलोग्राम रंगीन चटनी को मौके पर ही नष्ट कराया गया और मोमो के सैंपल जांच के लिए भेजे गए।
साकेत नगर से लेकर मसवानपुर के ठेलों तक चला हंटर
अभियान के अगले चरण में खाद्य सुरक्षा अधिकारी रश्मि प्रभा ने साकेत नगर स्थित एक अन्य मोमोज फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया, जहां से 30 किलो खराब चटनी जब्त कर नष्ट की गई। केवल फैक्ट्रियां ही नहीं, टीम ने मसवानपुर क्षेत्र में सड़क किनारे मोमो बेचने वाले ठेलों की भी सघन जांच की। ठेलों पर बेचे जा रहे केमिकलयुक्त रंगीन फिंगर चिप्स और स्वच्छता मानकों के विपरीत बनी चटनी को मौके पर ही फिंकवा दिया गया और दुकानदारों को कड़ी चेतावनी दी गई।
सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि कानपुर के नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सभी जब्त नमूनों को प्रयोगशाला भेज दिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त विधिक व आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। अस्वच्छ परिस्थितियों में काम करने वालों के खिलाफ यह हंटर आगे भी लगातार जारी रहेगा।
