Vegetable Price Hike: एक ओर आसमान से आग बरस रही है और दूसरी ओर जेब कट रही है। ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि चिलचिलाती धूप और हीटवेव के बीच में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं जिसका सीधा असर जेब पर पड़ रहा है और रसोई का बजट बिगड़ रहा है, लेकिन दाम क्यों बढ़ रहे हैं? यह समझना भी बेहद जरूरी है।
सब्जियों के दाम में क्यों हुआ इजाफा?
चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं की वजह से खेतों में लगी सब्जी की फसल को काफी नुकसान हुआ है। मौसम की मार के चलते वह सूख गई हैं और इसी वजह से अचानक ही सब्जियों के दाम में भारी इजाफा हुआ है। 10-15 रुपये किलो बिक रही सब्जी का दाम अचानक से 10-20 रुपये किलो बढ़ गया है। ब्याज की कीमत 40-50 रुपये प्रति किलो हो गई है। जिसकी वजह से रसोई का बजट बिगड़ गया और लोग सब्जी की खरीदारी में कटौती करने लगे।
क्या है कारण
- सब्जियों के उत्पादन में कमी
- मांग में इजाफा
- स्टोरेज की लागत
सब्जियों के उत्पादन में कमी
भीषण गर्मी की वजह से सब्जियों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है और गर्म हवाओं की वजह से सब्जियां जल जाती हैं, जिसका सीधा असर सब्जियों की पैदावार में दिखाई देता है। साथ ही सब्जियों को कीट-पतंगों की वजह से भी नुकसान होता है। ऐसे में सब्जियों का उत्पादन कम हो जाता है।
वहीं, एक इलाके से दूसरे इलाके तक सब्जियों को पहुंचाने के लिए परिवहन का इस्तेमाल होता है और इस भीषण गर्मी में परिवहन में भी सब्जियां खराब हो जाती हैं।

सब्जियों के दाम में इजाफा
मांग में इजाफा
कम उत्पादन और बढ़ी हुई मांग की वजह से सब्जियों के दाम में इजाफा होता है। गर्मी के मौसम में अक्सर खीरे, ककड़ी जैसी सब्जियों की मांग ज्यादा होती है, लेकिन पूरी तरह से आपूर्ति नहीं हो पाती है।
स्टोरेज की लागत
जिस गर्मी से इंसान परेशान है सोचिये सब्जियों को कितना ज्यादा नुकसान नहीं होता होगा। हमें एसी की हवा तक कम लगने लगी है और बार-बार उसकी सर्विसिंग करा रहे हैं। ठीक उसी प्रकार गर्मी में सब्जियों को तरोताजा रखने के लिए ठंडे स्टोरेज की मदद ली जाती है जिसमें बिजली ज्यादा खर्च होती है। ऐसे में सब्जियों की लागत में इजाफा हो जाता है जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब में दिखाई देता है।
अमूमन गर्मी के मौसम में सब्जियों के दाम में इजाफा देखा जाता है, लेकिन मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही दाम गिरने लगते हैं। इसके अतिरिक्त सरकार भी दामों को नियंत्रित करने के लिए तरह-तरह की कोशिशें करती रहती हैं।
