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होम लोन लेने से पहले बेहतरीन क्रेडिट स्कोर क्यों है जरूरी? जानिए पूरा गणित

Credit Score: होम लोन मंजूर कराने और कम ब्याज दर (रिस्क-बेस्ड प्राइसिंग) का लाभ पाने के लिए 750+ क्रेडिट स्कोर जरूरी है। समय पर भुगतान और कम क्रेडिट यूटिलाइजेशन से लाखों की बचत होगी।

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होम लोन से पहले सुधारें क्रेडिट स्कोर

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Credit Score : घर खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय और भावनात्मक फैसला होता है। ज्यादातर लोग इस सपने को पूरा करने के लिए होम लोन (Home Loan) का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बैंक आपको लोन देगा या नहीं, और देगा तो किस ब्याज दर पर देगा। यह काफी हद तक आपके क्रेडिट स्कोर (जैसे CIBIL स्कोर) पर निर्भर करता है। क्रेडिट स्कोर मूल रूप से एक तीन अंकों का नंबर होता है, जो बैंकों को यह बताता है कि बीते समय में आपने अपने लोन की ईएमआई (EMI) और क्रेडिट कार्ड के बिलों का भुगतान कितने अनुशासित तरीके से किया है। होम लोन के लिए आवेदन करने से कम से कम 6 महीने पहले अपने क्रेडिट स्कोर की स्थिति जानना और उसे सुधारना एक बेहद समझदारी भरा कदम साबित हो सकता है।

750+ क्रेडिट स्कोर क्यों माना जाता है आपके लिए 'गोल्डन नंबर'?

भारत में बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों (जैसे SBI, HDFC, और ICICI) के नियमों के अनुसार, 750 या उससे अधिक के क्रेडिट स्कोर को बेहतरीन माना जाता है। जब आपका स्कोर इस दायरे में होता है, तो बैंक आपको एक 'कम जोखिम वाला' यानी भरोसेमंद ग्राहक मानते हैं। ऐसे ग्राहकों के लोन आवेदन बहुत तेजी से मंजूर होते हैं क्योंकि उनका पुराना वित्तीय रिकॉर्ड साफ-सुथरा होता है। इसके विपरीत, अगर आपका क्रेडिट स्कोर 700 से कम है, तो बैंक आपके आवेदन को संदेह की नजर से देखते हैं। ऐसी स्थिति में बैंक आपसे अतिरिक्त दस्तावेज, गारंटर की मांग कर सकते हैं, या फिर आपके लोन के आवेदन को सीधे खारिज भी कर सकते हैं।

रिस्क-बेस्ड प्राइसिंग: अच्छा स्कोर कैसे बचाएगा आपके लाखों रुपये?

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि क्रेडिट स्कोर सिर्फ लोन मंजूर कराने के लिए जरूरी है, लेकिन इसका सबसे बड़ा सीधा असर आपकी ब्याज दर पर पड़ता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के बाद अब करीब सभी बैंक 'रिस्क-बेस्ड प्राइसिंग' मॉडल पर काम करते हैं। इसका मतलब है कि जिसका क्रेडिट स्कोर जितना अच्छा होगा, उसे उतनी ही कम ब्याज दर की पेशकश की जाएगी।

चूंकि होम लोन 15 से 30 साल जैसी लंबी अवधि के लिए लिया जाता है, इसलिए ब्याज दर में महज 0.50% का अंतर भी आपके लाखों रुपये बचा सकता है। उदाहरण के लिए अगर आप 9.00% की सामान्य दर पर 50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो आपकी मासिक ईएमआई करीब 44,986 रुपये होगी। वहीं, अगर 750 से ऊपर स्कोर होने के कारण आपको 8.50% की रियायती दर मिलती है, तो आपकी ईएमआई घटकर 43,391 रुपये हो जाएगी। दिखने में यह अंतर छोटा है, लेकिन पूरे 20 सालों में आप सीधे तौर पर 4 लाख रुपये से अधिक के ब्याज की बचत कर लेंगे।

लोन की रकम और डाउन पेमेंट पर क्रेडिट स्कोर का असर

आपका क्रेडिट स्कोर सिर्फ ब्याज दर ही तय नहीं करता, बल्कि यह भी तय करता है कि बैंक आपको कुल कितनी रकम उधार देने के लिए तैयार है। मजबूत क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक आपकी कुल योग्यता के अधिकतम हिस्से तक लोन देने को राजी हो जाते हैं, जिससे आपको अपनी पसंद का घर खरीदने में आसानी होती है। इसके उलट, कमजोर क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक जोखिम कम करने के लिए लोन की राशि को घटा देते हैं। इसका नुकसान यह होता है कि आपको प्रॉपर्टी की कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा खुद अपनी जेब से 'डाउन पेमेंट' के रूप में देना पड़ता है, जो अचानक से प्रबंधित करना काफी मुश्किल हो सकता है।

क्रेडिट स्कोर को तेजी से सुधारने के 4 व्यावहारिक तरीके

अगर आपका क्रेडिट स्कोर इस समय कम है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार कुछ वित्तीय आदतों को बदलकर अगले 3 से 6 महीनों में इसे दोबारा मजबूत किया जा सकता है:-

समय पर भुगतान करें

अपने सभी पुराने लोन की ईएमआई और क्रेडिट कार्ड के बिलों का भुगतान तय तारीख से पहले करें। क्रेडिट स्कोर तय करने में 35% भूमिका इसी बात की होती है।

क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो सीमित रखें

अपने क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट का आंख मूंदकर इस्तेमाल न करें। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, अपनी कुल उपलब्ध लिमिट का केवल 30% या उससे कम ही खर्च करना चाहिए।

बार-बार लोन के लिए आवेदन न करें

जब आप एक साथ कई बैंकों में लोन के लिए पूछताछ या आवेदन करते हैं, तो हर बैंक आपकी 'हार्ड इंक्वायरी' (Hard Inquiry) करता है। इससे क्रेडिट ब्यूरो को लगता है कि आप पैसों के संकट में हैं, और आपका स्कोर गिर जाता है।

क्रेडिट रिपोर्ट की गलतियां ठीक कराएं

साल में कम से कम एक बार सिबिल (CIBIL) या एक्सपेरियन जैसी आधिकारिक वेबसाइटों से अपनी मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट निकालें। यदि उसमें कोई गलत जानकारी या बंद हो चुके लोन का स्टेटस एक्टिव दिख रहा है, तो तुरंत ऑनलाइन विवाद दर्ज करें। आरबीआई के नियमों के अनुसार, ब्यूरो को 30 दिनों के भीतर इस गलती को सुधारना होता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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