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जुआ, पैसों का लालच और बर्बादी...युवाओं में बढ़ी कम उम्र में सट्टे की लत, इससे बाहर आना संभव, सरकार जागे: स्टडी

Cognitive Behavioral Therapy Gambling: स्मार्टफोन बना 'डिजिटल कैसीनो'! मोनाश यूनिवर्सिटी के अध्ययन में बड़ा खुलासा, कम उम्र में जुए की लत से उजड़ रहे घर और रिश्ते। जानें सरकार और माता-पिता के लिए क्यों है यह 'वेक-अप कॉल'।

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जुआ, पैसों का लालच और बर्बादी...युवाओं में बढ़ी कम उम्र में सट्टे की लत, इससे बाहर आना संभव, सरकार जागे: स्टडी

Youth Gambling Addiction Risks: स्मार्टफोन और इंटरनेट की आसान पहुंच ने जहां एक तरफ दुनिया को मुट्ठी में ला दिया है, वहीं इसके पीछे छिपे एक काले दलदल ने नई पीढ़ी के भविष्य पर बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित मोनाश यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ चार्ल्स लिविंगस्टोन के नेतृत्व में हुए एक नए और विस्तृत अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि युवाओं और किशोरों में कम उम्र में जुए (Gambling) और ऑनलाइन सट्टेबाजी की लत महामारी की तरह फैल रही है।

यह रिपोर्ट महज एक चेतावनी नहीं, बल्कि व्यवस्था, समाज और परिवारों के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है, जो साफ कहती है कि यदि समय रहते सरकारों ने सख्त नियमन नहीं बनाए और माता-पिता ने अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी, तो यह लत हंसते-खेलते परिवारों को पूरी तरह तबाह कर देगी।

WHO की मुहर: 'शौक' नहीं, मानसिक विकार है जुए की लत

अध्ययन में इस बात को पूरी स्पष्टता से सामने रखा गया है कि नुकसान होने के बावजूद बार-बार जुआ या सट्टा खेलने की तीव्र इच्छा पर नियंत्रण न रख पाना कोई सामान्य आदत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकी मनोरोग संघ सहित अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा प्रणालियों ने इसे 'व्यवहार संबंधी विकार' (Behavioral Disorder) के रूप में मान्यता दी है।

किशोरावस्था का नाजुक मोड़ और 'डोपामिन' का खेल

वैज्ञानिकों के अनुसार, किशोरावस्था में इंसानी दिमाग के विकास की प्रक्रिया ऐसी होती है जहां जोखिम उठाने (Risk-taking) की प्रवृत्ति सबसे अधिक होती है। ऐसे में ऑनलाइन ऐप्स पर जब कोई छोटा सा भी इनाम या 'जीत' मिलती है, तो दिमाग में डोपामिन (Dopamine) नामक खुशी का रसायन तेजी से रिलीज होता है। यह रासायनिक बदलाव बच्चों को बार-बार सट्टा लगाने के लिए उकसाता है, जिससे वे अनजाने में बेहद कम उम्र में ही गंभीर लती बन जाते हैं।

बर्बादी का गणित: अध्ययन के चौंकाने वाले आंकड़े

अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि जुए का असर सिर्फ पैसा हारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिंदगी को लील रहा है।

युवाओं पर सबसे बड़ा वार: 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं पर जुए की लत का जोखिम सबसे घातक है। नियमित रूप से ऑनलाइन सट्टेबाजी और पोकर मशीन ('पोकी') खेलने वाले इस आयु वर्ग के लगभग 90 प्रतिशत लोग गंभीर आर्थिक संकट, डिप्रेशन और टूटते रिश्तों का सामना कर रहे हैं।

प्रभाव का दायरा: केवल ऑस्ट्रेलिया की बात करें तो 8% से अधिक वयस्क इसके दुष्प्रभावों से जूझ रहे हैं, जबकि 1% लोग अत्यधिक जोखिम वाले स्तर पर पहुंच चुके हैं।

बचपन का एक्सपोजर: जो व्यक्ति जितनी कम उम्र में जुए के संपर्क में आता है, वयस्क होने पर उसके लती बनने और अपनी पूरी जमा-पूंजी या घर तक गंवाने की आशंका उतनी ही अधिक हो जाती है।

आर्थिक तबाही से लेकर आत्महत्या के जोखिम तक

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जुए की लत से होने वाला नुकसान बहुआयामी है, जो समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है:

मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात: सट्टे में पैसे हारने के बाद पैदा होने वाला पछतावा, अपराधबोध (Guilt), शर्म और मानसिक तनाव सीधे तौर पर अवसाद (Depression) और गंभीर चिंता विकारों को जन्म देता है। शोध में पाया गया है कि यह दलदल युवाओं में आत्महत्या के जोखिम को डरावने स्तर तक बढ़ा देता है।

पारिवारिक हिंसा और उपेक्षा: जुए की लत केवल खेलने वाले को नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार को लील जाती है। माता-पिता में इस लत का सीधा संबंध घरेलू हिंसा, वैवाहिक विवाद और मासूम बच्चों के साथ दुर्व्यवहार या उनकी उपेक्षा से पाया गया है।

जुए की लत का पूरी तरह उपचार संभव

जुए की लत का पूरी तरह उपचार संभव

सरकार के लिए कड़ा संदेश: विज्ञापनों पर लगे लगाम

अध्ययन में सरकारों की वर्तमान नीतियों और ढीले नियमों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। वर्तमान में प्रस्तावित प्रतिबंध बच्चों को बचाने के लिए नाकाफी हैं।

डेटा माइनिंग का खतरनाक खेल: ऑनलाइन सट्टेबाजी कंपनियां डिजिटल माध्यमों से उपयोगकर्ताओं का बड़ा डेटा एकत्र करती हैं और उनका विस्तृत प्रोफाइल तैयार करती हैं। इसके बाद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जरिए युवाओं को टारगेट करके आक्रामक और लुभावने विज्ञापन दिखाए जाते हैं।

खेलों का व्यवसायीकरण: टेलीविजन और बड़ी खेल प्रतियोगिताओं के दौरान जिस तरह जुए और फैंटेसी ऐप्स के विज्ञापन दिखाए जाते हैं, वे सीधे तौर पर मानवीय भावनाओं को प्रभावित करने के लिए तैयार किए जाते हैं।

सख्त कार्रवाई की मांग: विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को तत्काल प्रभाव से जुए के विज्ञापनों पर पूर्ण या कड़े प्रतिबंध लगाने चाहिए और आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में जुए की मशीनों की उपलब्धता को सख्ती से नियंत्रित करना होगा।

माता-पिता के लिए 'प्रैक्टिकल गाइड': आज ही उठाएं ये 3 कदम

अध्ययन स्पष्ट करता है कि कंपनियों को कोसने के साथ-साथ माता-पिता को भी अपने घर की सुरक्षा की कमान खुद संभालनी होगी। बच्चों को सही और गलत की पहचान कराने के लिए परिवार के स्तर पर तुरंत ये कदम उठाने चाहिए:

मनोरंजन और जुए का अंतर समझाएं: बच्चों के साथ खेलों पर बात करते समय हमेशा खेल की भावना, मस्ती और मनोरंजन पर जोर दें। उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझाएं कि जुआ या सट्टा किसी खेल का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक वित्तीय जोखिम है।

रात 8:30 बजे के बाद खेल प्रसारण से दूरी: मौजूदा और प्रस्तावित नियमों के तहत, रात साढ़े आठ बजे के बाद टीवी और डिजिटल चैनलों पर जुए के विज्ञापन प्रसारित करने की छूट होती है। बच्चों को इस समय के बाद खेल प्रसारण दिखाने से बचें ताकि वे इन विज्ञापनों के सीधे प्रभाव में न आएं।

डिजिटल बैरिकेडिंग का करें इस्तेमाल: आपका बच्चा जो भी मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर इस्तेमाल कर रहा है, उस पर जुए, सट्टे या भुगतान (Payment Gateways) को प्रतिबंधित करने वाले पैरेंटल कंट्रोल और ऑनलाइन ब्लॉकिंग टूल्स का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।

कलंक और शर्म छोड़कर इलाज अपनाना जरूरी

अध्ययन का एक सकारात्मक पहलू यह है कि जुए की लत का पूरी तरह उपचार संभव है। संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (Cognitive Behavioral Therapy - CBT) जैसी आधुनिक पद्धतियां व्यक्ति की नकारात्मक सोच और व्यवहार को बदलने में बेहद कारगर साबित होती हैं। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात पर दुख जताया गया है कि सामाजिक कलंक, लोकलाज और शर्म के डर से पीड़ित लोग डॉक्टर के पास जाने से कतराते हैं। समाज को इस हिचक को तोड़ना होगा और प्रभावित युवाओं को इलाज के लिए प्रेरित करना होगा।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ा author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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