देश

बंगाल में BJP के कार्यभार संभालते ही बड़ा फैसला; TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की Z+ सुरक्षा ली गई वापस

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के कार्यभार संभालने के पहले दिन सुरक्षा समीक्षा के बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की Z+ श्रेणी सुरक्षा वापस ले ली गई। अब उन्हें सांसद स्तर की सामान्य सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की जाएगी।

Image

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जीटीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी (फाइल फोटो)

Photo : PTI

West Bengal News: पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार के कार्यभार संभालने के पहले ही दिन सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला। इस समीक्षा के बाद टीएमसी सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की Z+ सुरक्षा वापस ले ली गई है। अब उन्हें केवल सांसदों को मिलने वाली सामान्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। कोलकाता पुलिस ने उनके हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास ‘शांतिनिकेतन’ और कैमाक स्ट्रीट ऑफिस के बाहर तैनात अतिरिक्त सुरक्षा बल को भी तुरंत हटा दिया। इसी तरह, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर भी सुरक्षा व्यवस्था में कटौती की गई।

सुरक्षा समीक्षा की गई

बता दें कि भाजपा की 207 सीटों पर जीत और सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह व्यापक सुरक्षा समीक्षा की गई, जिसके तहत कई वीआईपी सुरक्षा प्रबंधों में बदलाव किया गया। सुबह-सुबह ही अतिरिक्त पुलिसकर्मी, स्कैनर मशीनें और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों को हटा लिया गया। Z+ सुरक्षा में आमतौर पर CRPF कमांडो, स्थानीय पुलिस और आवश्यकता पड़ने पर NSG के प्रशिक्षित जवान शामिल होते हैं। यह सुरक्षा व्यवस्था व्यक्ति को उसके आवास, यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान करती है। अतिरिक्त सुरक्षा परत हटाए जाने के बाद अब अभिषेक बनर्जी की आवाजाही पहले जैसी भारी सुरक्षा घेरे में नहीं होगी। अब उनके लिए पहले की तरह एडवांस रूट चेकिंग, ट्रैफिक को पूरी तरह से खाली कराने जैसी विशेष व्यवस्थाएं लागू नहीं होंगी, जिससे उनकी सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत कम कड़ी रहेगी।

टीएमसी कार्यकर्ताओं में नाराजगी

इस फैसले के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई टीएमसी नेताओं का कहना है कि यह कदम राजनीतिक प्रतिशोध जैसा लगता है और उनका आरोप है कि सत्ता बदलते ही सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। वहीं दूसरी ओर भाजपा समर्थक इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहे हैं और उनका कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा समय-समय पर होती रहती है। यह पूरा मामला अब केवल सुरक्षा में बदलाव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे सत्ता परिवर्तन के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है। 15 वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस की सरकार रहने के बाद अब सत्ता में आए बदलाव के साथ ही पुराने प्रभावशाली नेताओं की सुरक्षा में कटौती हुई है। इसका असर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके परिवार तक महसूस किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार का उद्देश्य राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और समान सुरक्षा मानकों को लागू करना है। हालांकि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी इसे एकतरफा और लक्षित कार्रवाई के रूप में देख रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और उसमें बदलाव की प्रक्रिया जारी रह सकती है। इस पूरे मुद्दे पर अभिषेक बनर्जी ने फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी के अंदर इस पर लगातार चर्चा चल रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इसे एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है, जहां लंबे समय से चली आ रही विशेष सुरक्षा और सुविधाओं को अब सामान्य स्तर पर लाया जा रहा है।

Pooja Mehta
पूजा मेहताauthor

पूजा मेहता एक वरिष्ठ टेलीविज़न पत्रकार हैं, जिन्हें रिपोर्टिंग का लगभग 15 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने राजनीति, आतंकवाद, आंतरिक संघर्ष, रक्षा, पर्यावरण और अपराध पर व्यापक रिपोर्टिंग की है, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों पर गहरा फोकस रखते हुए। संघर्षग्रस्त इलाकों से उनकी ज़मीनी रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों की गहन समझ उन्हें पैनी दृष्टि और विश्वसनीय विश्लेषण के लिए अलग पहचान दिलाती है। वह प्रमाणित Defence Correspondent हैं और अमेरिकी विदेश विभाग के प्रतिष्ठित International Visitor Leadership Program (IVLP) की एलुमनी भी हैं, जिससे विदेशी नीति, सुरक्षा और सामरिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई है।

और पढ़ें
End of Article