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Apple AirTag का इस्तेमाल कर महिला की कर रहा था जासूसी, देश में इस तरह का पहला मामला, FIR दर्ज

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 2, 2023, 04:47 PM IST

Apple AirTag: महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि मई में पहली बार उसे अपने आईफोन 13 प्रो मैक्स पर एक अलर्ट मैसेज मिला था, जिसमें लिखा था कि 'एयरटैग आपका पीछा कर करा है।' इसके कुछ दिनों बाद, जब वह घर से अपने ऑफिस जा रही थी, उसी तरह का एक मैसेज उसे फिर से प्राप्त हुआ।

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एयरटैग

Photo : Twitter

Apple AirTag: Apple के एयरटैग का इस्तेमाल कर महिला की जासूसी करने का देश में पहला मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति ब्लूटूथ डिवाइस एयरटैग की मदद से महिला का पीछा कर रहा था और उसकी हर गतिविध पर नजर रख रहा था, जिसके बाद अहमदाबाद साइबर सेल ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी महिला का पूर्व साथी है, महिला का आरोप है कि एयरटैग का इस्तेमाल कर आरोपी ने महिला की लोकेशन और फोन कॉल को रिकॉर्ड किया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 डी (पीछा करना) और सूचना और प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 ई (शारीरिक गोपनीयता का उल्लंघन) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

मोबाइल फोन पर मई महीने में आया था पहला अलर्ट मैसेज

शिकायतकर्ता के अनुसार, मई में पहली बार उसे अपने आईफोन 13 प्रो मैक्स पर एक अलर्ट मैसेज मिला था, जिसमें लिखा था कि 'एयरटैग आपका पीछा कर करा है।' इसके कुछ दिनों बाद, जब वह घर से अपने ऑफिस जा रही थी, उसी तरह का एक मैसेज उसे फिर से प्राप्त हुआ। 29 अगस्त को ऑफिस जाते समय उन्हें फिर से ऐसा ही मैसेज मिला, जिसके बाद उनके ड्राइवर पर क्लिक किया, जिसमें कहा गया था कि आपकी लोकेशन एयरटैग के मालिक द्वारा देखी जा सकती है।

ड्राइवर और बेटी के फोन पर भी आया मैसेज

पुलिस ने बताया, शिकायतकर्ता रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़ी हुई है। उसे शक था कि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसके बाद जुलाई की शुरुआत में उन्होंने साइबर सेल में इसको लेकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि ठीक इसी तरह का अलर्ट मैसेज उनके ड्राइवर और बेटी को भी मिला है। इसके बाद उन्होंने डिवाइस का पता लगाने के लिए कार को सर्विस स्टेशन पर भेजा, जिसमें पुलिस को ड्राइवर की सीट के पीछे सीट कवर के नीचे एयरटैग चिपका हुआ मिला। साइबर सेल के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की पहचान कर ली गई है।

2021 में लॉन्च किया गया था एयरटैग

Apple का AirTag 2021 में लॉन्च किया या था। इसके बाद इसके दुरुपयोग की खबरें सामने आईं, जिसके बाद 2022 में Apple ने अपनी वेबसाइट पर एक सार्वजनिक बयान जारी किया जिसमें कहा गया था किएयरटैग को लोगों को उनके निजी सामान का पता लगाने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, न कि लोगों या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति को ट्रैक करने के लिए और हम अपने उत्पादों के किसी भी दुर्भावनापूर्ण उपयोग की कड़ी से कड़ी निंदा करते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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