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दिल्ली की महिलाओं के लिए कब शुरू हो रही है प्रतिमाह 1,000 रुपये देने की योजना? CM आतिशी ने किया ये ऐलान

Scheme for Women of 1000 Rs: दिल्ली में महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये देने वाली योजना की शुरुआत कबसे हो रही है? इस सवाल का जवाब मुख्यमंत्री आतिशी ने दिया है। उन्होंने बताया है कि दिल्ली की महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये देने की योजना 7-10 दिनों में शुरू होगी।

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आतिशी, मुख्यमंत्री, दिल्ली

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Delhi: दिल्ली की महिलाओं के लिए प्रतिमाह 1,000 रुपये देने की योजना कब शुरू हो रही है? इसके बारे में दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने जानकारी साझा की। उन्होंने शुक्रवार को शहर की महिलाओं को 1,000 रुपये की मासिक सहायता प्रदान करने वाली ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ को अगले 7 से 10 दिनों में शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार पंजीकरण प्रक्रिया पर काम कर रही है।

31 मार्च, 2025 तक महिलाओं को इस योजना की एक या दो किश्त मिलेंगी

आतिशी ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष के अंत से पहले 31 मार्च, 2025 तक महिलाओं को इस योजना के तहत एक या दो किस्तें मिलेंगी। आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को योजना शुरू करने की घोषणा की थी और वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में लौटती है तो राशि बढ़ाकर 2,100 रुपये कर दी जाएगी।

'महिलाओं को 1,000 रुपये की सहायता देने का अपना वादा पूरा किया'

आतिशी ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं को सशक्त बनाने के सरकार के वादे को पूरा करती है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने महिलाओं को 1,000 रुपये की सहायता देने का अपना वादा पूरा किया है। विपक्ष द्वारा इस पहल को बाधित करने के सभी प्रयासों के बावजूद हमने इसे सफलतापूर्वक लागू किया है।’’

आतिशी ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करना और यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें छोटी-छोटी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए परिवार के सदस्यों पर निर्भर ना रहना पड़े। पात्रता के संबंध में, आतिशी ने बताया कि वर्तमान या पूर्व स्थायी सरकारी कर्मचारी, जो महिलाएं सांसद, विधायक या पार्षद हैं या रही हैं, पिछले वित्तीय वर्ष में आयकर का भुगतान करने वाली महिलाएं और जो पहले से ही किसी भी प्रकार की पेंशन प्राप्त कर रही हैं, वे इस योजना के लाभ के लिए पात्र नहीं होंगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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