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जीवन में जो भी बनें, मातृभूमि, मातृभाषा, मां को कभी न भूलें, छात्रों से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की भावुक अपील

  • Authored by: रामानुज सिंह
  • Updated Dec 9, 2022, 08:32 PM IST

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) उत्तराखंड के देहरादून में दून यूनिवर्सिटी में छात्रों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि आप जीवन किसी भी पद तक पहुंचे। ऑफिसर, इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस, आईपीएस या और कुछ बन जाएं लेकिन आप को अपनी जमीन कभी नहीं भूलनी चाहिए।

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दून यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

Photo : ANI

उत्तराखंड के देहरादून में दून यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) ने इमोशनल भाषण दिया। उन्होंने मातृभूमि, मातृभाषा और मां की महत्ता को बताया। साथ ही उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें, भले ही वे आगे के जीवन में किसी भी पद पर हों। उन्होंने अपने स्पीच कहा कि मैं आज खुश हूं, जब मैं छोटी हमको मातृभूमि, मातृभाषा और मां के बारे में पढ़ाया जाता है। इसलिए सदा सर्वदा मातृभूमि, मातृभाषा, मां का बड़ा महत्व है। जिसके पास ममता नहीं, उसको हम ज्ञानी कहेंगे तो अज्ञानी किसको कहेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि इसलिए आज मैं खुश हूं आपने किताबी भाषा के साथ-साथ यहां के लोकल भाषा को भी यहां सिखाया जाता है। कहा जाता है मां जैसी भी हो, दूसरे की दृष्टि में मां गरीब हो, देखने में जैसी भी हो मां, मां होती है। मातृभाषा लोगों के नजरों में कैसी भी हो मातृभाषा अपनी होती है। दुनिया की जितनी भी भाषा है। सीखने में कोई भी बाधा नहीं है। लेकिन अपनी भाषा, अपने घरों में, अपने समाज में यूज करना, हम लोगों का कर्तव्य होता है। नहीं हम लोगों की पहचान खो जाएगी। इसलिए मातृभाषा में बोलना और मातृभूमि को श्रद्धा करना, मातृभूमि के लिए जिंदगी तक देना, मातृभाषा और मां को प्यार करना हमलोगों का कर्तव्य है। इसी से हमलोगों की पहचान और अस्मिता रहती है।

पढ़ाई जितनी भी की हो, आप जो भी बन जाओ, आप कल ऑफिसर बनेंगे। इंजीनिर बनेंगे। डॉक्टर बनेंगे। आईएएस, आईपीएस बनेंगे। लेकिन आप को अपनी जमीन कभी नहीं भूलनी चाहिए। विदेशों ने हम लोगों पर इतने दिनों तक शासन किया। लेकिन आज भी भारत जैसे भी हो, जो भी हो। आज भारत को सभी देख रहे हैं, क्यों? भारत के लोगों का भारत के प्रति, अपनी मातृभूमि के प्रति, भारत में विभिन्नता में जो एकता है। वसुधैवकुटुंबकम की जो भावना है। यही हमलोगों को बांधकर रखती है। यही मैं आप सबसे आशा करूंगी कि आप आगे जाकर जो भी बने लेकिन भारतीयता को बनाए रखें।

रामानुज सिंह
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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