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वंदे भारत पर फिर पथराव: अब यूपी के बाराबंकी में फेंके गए पत्थर, कोच का शीशा टूटा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 7, 2023, 08:34 AM IST

Vande Bharat Train Stone Pelting: यह घटना तब हुई जब वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन गोरखपुर से लखनऊ की ओर से जा रही थी। करीब 10 बजे बाराबंकी के सफेदाबाद रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन पर पत्थर फेंगे गए, जिससे उसके एक कोच का शीशा टूट गया।

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वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर फिर से पथराव

Photo : BCCL

Vande Bharat Train Stone Pelting: वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर पथराव की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक बार फिर ट्रेन पर पत्थरबाजी हुई है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में कुछ अज्ञात लोगों ने वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थर बरसाए, जिससे कोच का शीशा टूट गया। उधर, आरपीएफ ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन गोरखपुर से लखनऊ की ओर से जा रही थी। करीब 10 बजे बाराबंकी के सफेदाबाद रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन पर पत्थर फेंगे गए, जिससे उसके एक कोच का शीशा टूट गया। करीब 10:40 पर ट्रेन लखनऊ पहुंची, तब आरपीएफ की एस्कोर्ट ट्रेन ने कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी।

कोच सी-2 पर हुआ पथराव

रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, बाराबंकी से लखनऊ के लिए निकली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन जैसे ही सफेदाबाद स्टेशन के पास पहुंची, उस पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने पथराव किया। पत्थर ट्रेन के कोच नंबर सी-2 पर लगे, जिससे सीट नंबर तीन व चार के पास वाली खिड़की का कांच टूट गया। अधिकारियों का कहना है कि घटना के बाद आरपीएफ की एक टीम सफेदाबाद स्टेशन पहुंची। हालांकि वहां पर कोई नहीं मिला, जिसके बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। उन्होंने बताया, सीसीटीवी फुटेज के जरिए अराजकतत्वों की तलाश की जा रही है।

पहले भी हुई हैं पत्थरबाजी की घटनाएं

बता दें, इससे पहले भी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थरबाजी की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पिछले महीने अयोध्या में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थर चलाए गए थे। वहीं, इससे पहले कोलकाता, बिहार व कई जगहों पर ऐसी ही घटनाएं सामने आई थीं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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