उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को झटका लगा है। कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी कभी बसपा में थे और मायावती के काफी खास माने जाते थे, जब बसपा से कांग्रेस में आए तो कई तरह के दावे हुए थे, लेकिन अब नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया है और शायद नए ठिकाने की तलाश में है। रिपोर्ट के अनुसार वो चंद्रशेखर आजाद के साथ जा सकते हैं। हालांकि सिद्दीकी ने भविष्य की योजना पर अभी कोई बात नहीं कही है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने क्यों छोड़ी कांग्रेस?
न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए पूर्व MLA नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, "मुझे किसी से कोई नाराजगी नहीं है। मैं खड़गे जी, राहुल जी, प्रियंका जी, सोनिया जी की इज्जत करता हूं और करता रहूंगा। वहां मेरे लिए कोई काम नहीं था। मैं जमीनी स्तर का आदमी हूं। आठ साल तक मैं जमीनी स्तर पर काम नहीं कर पाया। मैं कभी कोई हाई-प्रोफाइल नेता नहीं रहा, न अब हूं, इसलिए मैं जमीनी स्तर पर काम करना चाहता हूं, इसीलिए मैंने कांग्रेस पार्टी छोड़ी। किसी को मीडिया डिपार्टमेंट का चेयरमैन बनाना जमीनी स्तर का काम नहीं है। किसी को कमेटी का सदस्य बनाना जमीनी स्तर का काम नहीं है...मैंने नेताओं से कहा कि मैं संगठन का आदमी हूं।"
समर्थकों के साथ सिद्दीकी का इस्तीफा
जब उनसे पूछा गया कि उनके इस्तीफे के बाद क्या और लोग कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देंगे, तो पूर्व MLA नसीमुद्दीन सिद्दीकी कहते हैं, "अभी हर जिले में सैकड़ों लोग हैं। कुछ जिलों में तो हजारों हैं। अभी तक सिर्फ 73 लोगों की लिस्ट दी गई है। ये जाने-माने लोग हैं। लेकिन और भी बहुत हैं। अगर मुझे प्रेशर पॉलिटिक्स करनी होती तो मैं वहीं रहता और जाने की धमकी देता। मैंने अपने लोगों से सलाह-मशविरा करने के बाद यह फैसला लिया है। मेरे लोग और मैं वापस जाने के मूड में नहीं हैं। मेरी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है...।"
2017 में बसपा ने निकाला
नसीमुद्दीन सिद्दीकी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा नाम रहा है। बुंदेलखुंड के बांदा जिले से तालुक्क रखने वाले सिद्दीकी कभी मायावाती के काफी खास थे, बसपा के पहले मुस्लिम विधायक थे। कभी इन्हें बसपा सरकार में मिनी सीएम भी कहा जाता था। 2017 में उन्हें मायावती ने पार्टी से बाहर निकाल दिया था, जिसके बाद 2018 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था।
