TMC Symbol Row: तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद में चुनाव आयोग (TMC symbol Conflict) ने अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने कहा है कि फिलहाल ममता बनर्जी गुट और अरूप रॉय गुट में से किसी को भी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल एवं घास’ चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
चुनाव आयोग (Election Commission TMC symbol freeze) ने कहा कि उसके सामने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं। एक गुट ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के नेतृत्व में है और दूसरा अरूप रॉय (Arup Roy) के नेतृत्व में। बता दें कि ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) की अगुवाई वाली बागी खेमे ने अरुप रॉय को AITC का चेयरमैन बनाया है। दोनों गुट खुद को पार्टी बताते हुए दावा कर रहे हैं। आयोग ने कहा कि इस विवाद पर पैराग्राफ 15 के तहत विस्तृत फैसला किया जाना बाकी है।
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दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह मिलेगा
अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को ऐसे अलग नाम से जाना जाएगा, जिसे वे आयोग के सामने प्रस्तावित करेंगे। दोनों गुटों को आयोग की ओर से मौजूदा उपचुनावों के लिए अब अलॉट नहीं हुए चुनाव चिन्हों की सूची में से अलग-अलग चुनाव चिन्ह दिए जाएंगे।
आयोग ने दोनों गुटों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपने गुट के लिए तीन नाम और तीन मुक्त चुनाव चिन्ह प्राथमिकता के क्रम में बताने को कहा है। इसके बाद आयोग इनमें से नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा।
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उपचुनावों को देखते हुए लिया गया अंतरिम फैसला
चुनाव आयोग ने कहा कि पैराग्राफ 15 के तहत विवाद पर अंतिम फैसला करने के लिए उपलब्ध समय पर्याप्त नहीं है। हालांकि, मौजूदा उपचुनावों में पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल को लेकर तत्काल स्थिति पैदा हो गई है। इसी वजह से दोनों गुटों के अधिकारों और हितों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।
टीएमसी को लेकर विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
आयोग के सामने यह विवाद जून 2026 में पहुंचा। रितब्रत बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल 11 फरवरी 2025 को समाप्त हो चुका था और इसके बाद उसके नाम पर लिए गए फैसलों को वैध नहीं माना जा सकता। इसके बाद 22 जून को एक विशेष सत्र बुलाए जाने और अरूप रॉय को राष्ट्रीय कार्यसमिति का अध्यक्ष चुने जाने का दावा किया गया।
वहीं ममता बनर्जी गुट ने इस दावे का विरोध किया और 20 जून की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पदाधिकारियों और कार्यसमिति के सदस्यों की घोषणा किए जाने की जानकारी आयोग को दी थी। आयोग ने 12 सितंबर को दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों की सुनवाई की। इसके बाद 17 सितंबर को अरूप रॉय और ममता बनर्जी, दोनों गुटों के प्रतिनिधियों को सुना गया।
चुनाव आयोग का अंतिम फैसला अभी बाकी
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम व्यवस्था मौजूदा उपचुनावों के उद्देश्य से है और पैराग्राफ 15 के तहत विवाद पर अंतिम फैसला होने तक लागू रहेगी। यानी आयोग ने अभी यह अंतिम तौर पर तय नहीं किया है कि पार्टी का आधिकारिक नाम और ‘फूल एवं घास’ चुनाव चिन्ह किस गुट को मिलेगा।
अभी तय नहीं हुआ कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था है। ममता बनर्जी और अरूप रॉय में से किस गुट को असली तृणमूल कांग्रेस माना जाएगा, इसका अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। आयोग अब चुनाव चिन्ह आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत दोनों गुटों के दावों की विस्तार से जांच करेगा।
आयोग ने माना कि पार्टी में दो प्रतिद्वंद्वी गुट मौजूद
अंतरिम आदेश की एक अहम बात यह है कि चुनाव आयोग प्रथम दृष्टया इस नतीजे पर पहुंचा है कि पार्टी के भीतर दो अलग-अलग गुट हैं और दोनों खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है, जबकि दूसरा अरूप रॉय के नेतृत्व वाला है। इसी वजह से आयोग ने पैरा 15 के तहत विस्तृत सुनवाई जरूरी मानी है।
