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'ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपने रुख पर खेद नहीं, हमेशा पार्टी लाइन पर ही रहा'; कांग्रेस से नाराजगी की खबरों के बीच बोले थरूर

थरूर ने केरल साहित्य महोत्सव के एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर केंद्र का समर्थन किया था और उन्हें इसका खेद नहीं है। उनका यह बयान इन हालिया खबरों के बीच आया है जिनमें ‘‘थरूर के पार्टी नेतृत्व से मतभेद’’ की बात कही गई है।

शशि थरूर

शशि थरूर (फाइल फोटो)

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ नाराजगी की चर्चाओं के बीच वरिष्ठ नेता और केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर अपने रुख को लेकर कहा है कि उन्हें इसके लिए खेद नहीं है। थरूर ने यह भी कहा कि उन्होंने संसद में पार्टी के घोषित रुख का कभी उल्लंघन नहीं किया और सैद्धांतिक रूप से उनकी एकमात्र सार्वजनिक असहमति 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर थी। उन्होंने कोझिकोड़ में केरल साहित्य महोत्सव में बोलते हुए यह बातें कहीं। शशि थरूर ने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर किसी भी मतभेद के बारे में संगठन के भीतर बात की जानी चाहिए न कि मीडिया में।

इस बात से आहत हैं शशि थरूर!

वरिष्ठ कांग्रेस नेता का यह बयान तब आया है जब खबरें चल रही हैं कि थरूर इस बात से आहत हैं कि राहुल गांधी ने हाल में कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार-बार उन्हें दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है। इन अटकलों को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी।

और क्या बोले शशि थरूर

इन अटकलों को खारिज करते हुए शशि थरूर ने कहा कि मैं पिछले 17 सालों से कांग्रेस में हूं। कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें मुझे अपनी पार्टी के नेतृत्व के साथ उठाना है, न कि सार्वजनिक मंच पर। उन्होंने कहा कि वे संसद सत्र के लिए दिल्ली जा रहे हैं, जहां उन्हें पार्टी नेतृत्व से अपनी बात रखने और उनका पक्ष सुनने का अवसर मिलेगा। थरूर ने कहा कि मेरे बारे में चल रही कुछ खबरें सही हो सकती हैं, जबकि कुछ पूरी तरह गलत भी हो सकती हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पहले ही सूचित कर दिया था कि वह एक साहित्य महोत्सव में शामिल होने के कारण पार्टी की एक बैठक में उपस्थित नहीं हो पाएंगे, क्योंकि लगातार यात्रा करना उनके लिए कठिन था। हालांकि मैं संसद में पार्टी की सभी गतिविधियों में जरूर शामिल रहूंगा और उसी दौरान पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर उचित मंच पर बातचीत करूंगा। इस दौरान कोच्चि में एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान उनके साथ कथित अनुचित व्यवहार को लेकर पूछे गए सवाल पर थरूर ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपने रुख पर खेद नहीं

इससे पहले, केरल लिटरेचर फेस्टिवल में एक सत्र के दौरान शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपने रुख का खुलकर बचाव किया और कहा कि वह इस मुद्दे पर पूरी तरह 'अनापोलोजेटिक' हैं। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उन्होंने एक अखबार में कॉलम लिखकर कहा था कि इस हमले को बिना सजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए और आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सीमित, सटीक सैन्य कार्रवाई होनी चाहिए।

थरूर ने कहा,'मैंने लिखा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ किसी लंबे युद्ध में नहीं उलझना चाहिए, लेकिन आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाते हुए एक काइनेटिक प्रतिक्रिया जरूरी है। मुझे आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने ठीक वही किया, जिसकी मैंने सिफारिश की थी। ऐसे में मैं इसकी आलोचना कैसे कर सकता था?' उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद उन्होंने सरकार के कदमों का पूरा समर्थन किया। हालांकि, जब सरकार ने उन्हें ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल के तहत विदेश भेजा, तो उनकी पार्टी को यह कदम पसंद नहीं आया। इस पर थरूर ने कहा कि इसके कारणों के बारे में आप उनसे ही पूछ सकते हैं।

मेरे लिए भारत सबसे पहले- थरूर

राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर देते हुए थरूर ने कहा कि जब देश की सुरक्षा, संप्रभुता और वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति का सवाल हो, तो भारत सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री ने भी यह प्रश्न किया था कि अगर भारत खत्म हो जाएगा तो कौन जीवित रहेगा? ऐसे में जब भारत दांव पर हो, जब भारत की सुरक्षा और दुनिया में उसका स्थान दांव पर हो तो भारत पहले आता है। राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन जब राष्ट्रीय हितों की बात हो, तो सभी को एकजुट होकर भारत के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।

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शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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