Monsoon Session: मॉनसून सत्र के पहले ही दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरुआती घंटे में ही स्थगित करनी पड़ गई। जैसे ही लोकसभा की कार्रवाही शुरू हुई, विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग है कि नीट पेपर लीक और राम मंदिर चंदा चोरी पर सदन के अंदर चर्चा हो। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विपक्ष सदन चलाने में सहयोग करे। राज्यसभा में भी यही हाल रहा।
लोकसभा की कार्यवाही स्थगित
विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, "आज देश बड़ी विकट परिस्थिति में खड़ा है...राम मंदिर के मामले में आस्था पर जो डकैती हुई, दान की जो चोरी हुई...उसपर सरकार का क्या जवाब है?...इसपर चर्चा क्यों ना हो?...अब सरकार की जवाबदेही है...सबसे पहले सरकार को NEET पर जवाब देना चाहिए, राम मंदिर चोरी पर जवाब देना चाहिए, उसके बाद ही कोई और बिल पर चर्चा होनी चाहिए...
राज्यसभा में भी हंगामा
इसी मुद्दे को लेकर राज्यसभा में भी हंगामा हुआ। जिसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही आज दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "आपने मुझे इस पेपर लीक और NEET परीक्षा घोटाले के बारे में अपनी बात रखने का मौका दिया है। यह मामला छात्रों से जुड़ा है; मैं लाखों बच्चों के भविष्य के बारे में बात कर रहा हूं। इस मुद्दे को लेकर हजारों छात्र जंतर-मंतर पर जमा हुए हैं। वहां लाठीचार्ज हुआ है। सरकार ताकत का इस्तेमाल करके आवाज दबाने और उन्हें वहां से हटाने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष की रणनीति
विपक्षी दलों ने सोमवार को फैसला किया गया कि वे संसद के मानसून सत्र में राम मंदिर ’चढ़ावा चोरी’, परीक्षाओं में कथित धांधली और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरेंगे और चर्चा की मांग करेंगे। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संसद भवन स्थित कक्ष में विपक्षी दलों के दोनों सदनों के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें सत्र के लिए रणनीति पर चर्चा की गई। इस बैठक में खरगे के अलावा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस नेता जयराम रमेश और प्रमोद तिवारी, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव, तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय और सागरिका घोष, शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की सांसद सुप्रिया सुले और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच द्रमुक ने इस बैठक से दूरी बनाई।
