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Underwater Metro: कैसी होगी भारत की पहली अंडरवॉटर मेट्रो? नॉर्मल मेट्रो से कितनी अलग, दुनिया देखेगी पानी के नीचे इंजीनियरिंग का चमत्कार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 4, 2024, 09:51 AM IST

Kolkata Metro Underwater Metro in India: कोलकाता मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर के लिए नदी के नीचे सुरंग बनाई गई है। यहीं से अंडर वॉटर मेट्रो होकर गुजरेगी। हुगली नदी के नीचे 520 मीटर लंबी मेट्रो सुरंग है, जिसे पार करने में यात्रियों को 1 मिनट से भी कम समय लगेगा। साथ ही रोमांच का भी अनुभव होगा।

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देश की पहली अंडरवॉटर मेट्रो टनल

Photo : Twitter

India's First underwater Metro Deatils in Hindi: बीते कुछ सालों में भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। फिर चाहे वह चांद की बात हो या फिर समुद्र का सीना चीर कर ब्रिज बनाना हो। अब इंजीनियरों ने एक और चमत्कार कर दिया है, जिसे देखकर कर दुनिया दांतो तले अंगुली दबाने को मजबूर हो जाएगी। दरअसल, भारत अपनी पहली अंडरवॉटर मेट्रो सेवा शुरू करने जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी 6 मार्च को कोलकाता में देश की पहली अंडरवॉटर मेट्रो सेवा का उद्धाटन करेंगे।

यह मेट्रो टनल भारत में किसी भी नदी के नीचे बनी पहली सुरंग है। जहां हुगली नदी के तल से 32 मीटर नीचे मेट्रो दौड़ेगी। हुगली नदी के नीचे चलने वाली देश की पहली अंडरवॉटर मेट्रो रेल हावड़ा को कोलकाता से कनेक्ट करेगी। इससे लोगों का आने-जाने का समय तो कम होगा ही, साथ ही यह सफर भी रोमांच से भरा होगा। आइए जानते हैं देश की इस पहली अंडरवॉटर मेट्रो की खासियत...

Underwater Metro

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ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर का है हिस्सा

बता दें, कोलकाता मेट्रो का काम कई चरणों में आगे बढ़ा है। मौजूदा चरण में शहर के ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर के लिए नदी के नीचे सुरंग बनाई गई है। यहीं से अंडर वॉटर मेट्रो होकर गुजरेगी। यह सेक्टर v से हावड़ा तक चलेगी। जानकारी के मुताबिक, हावड़ा मैदान-एस्प्लेनेड मेट्रो टनल भारत में किसी भी नदी के नीचे बनी पहली सुरंग है। इसके साथ ही हावड़ा मेट्रो स्टेशन अब भारत का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन बन गया है। यहां माजेरहाट मेट्रो स्टेशन भी इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है, जहां पर रेलवे ट्रैक को प्लेटफार्म के ठीक ऊपर बनाया गया है, ऐसा यह एकमात्र मेट्रो स्टेशन होगा।

Underwater Metro india

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भारत की पहली अंडरवॉटर मेट्रो: 520 मीटर लंबी है सुरंग

हावड़ा से एस्प्लेनेड तक का रास्ता करीब 4.8 किलोमीटर लंबा है। इस रूट पर हुगली नदी के नीचे 520 मीटर लंबी मेट्रो सुरंग है। अंडरग्राउंड पूरी टनल करीब 10.8 किलोमीटर लंबी है। पानी के नीचे 520 मीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को 1 मिनट से भी कम समय लगेगा। बता दें, इस मेट्रो की तुलना लंदन और पेरिस के बीच चलने वाली यूरोस्टार ट्रेनों से हो रही है।

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भारत की पहली अंडरवॉटर मेट्रो: पानी के नीचे मिलेगा 5G इंटरनेट

अंडरवॉटर मेट्रो में भी यात्रियों की सभी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। यहां यात्रियों को 5G इंटरनेट की सुविधा भी मिलेगी। बता दें, इस मेट्रो टनल का काम 2017 में शुरू हुआ था। पानी के नीचे टनल बनाने के लिए हजारों टन मिट्टी भी निकाली गई है। अधिकारियों का दावा है कि अंडरवॉटर मेट्रो टनल में पानी की एक बूंद भी प्रवेश नहीं कर सकती है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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