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नाम-सिंबल दोनों सुझाये फिर भी उद्धव ठाकरे कैंप का चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप

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  • Updated Oct 13, 2022, 02:58 PM IST

उद्धव ठाकरे कैंप के सुझाए नाम पर चुनाव आयोग ने नया नाम और सिंबल अलॉट किए। लेकिन ठाकरे कैंप का कहना है कि आयोग ने भेदभाव किया है।

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चुनाव आयोग के फैसले पर उद्धव ठाकरे को ऐतराज

शिवसेना की स्थापना बाला साहेब ठाकरे ने की थी। लेकिन शिवसेना अब किसकी होगी मामला चुनाव आयोग में हैं। चुनाव आयोग के सामने उद्धव ठाकरे कैंप और एकनाथ शिंदे गुट ने पार्टी पर दावेदारी ठोंकी है। 3 नवंबर को अंधेरी ईस्ट विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों गुटों ने जल्द से जल्द फैसले की अपील चुनाव आयोग से की थी। चुनाव आयोग ने फौरी तौर पर दोनों गुटों से नाम और सिंबल के विकल्प मांगे थे। दोनों गुटों की तरफ से नाम और सिंबल सुझाए गए। चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे कैंप और एकनाथ शिंदे गुट को अलग पहचान से मान्यता दी। हालांकि उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया है।

नाम और चुनाव चिन्ह पर ऐतराज

उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है, जिसमें पार्टी के प्रतीकों का वितरण करते समय पूर्वाग्रह, पक्षपात और बेईमानी का आरोप लगाया गया है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ शिंदे के विद्रोह के बाद शिवसेना को विभाजित करने के बाद उद्धव गुट एकनाथ शिंदे खेमे के साथ गतिरोध कायम है। चुनाव आयोग द्वारा मुंबई के अंधेरी में महत्वपूर्ण उपचुनावों से पहले शिवसेना के चुनाव चिन्ह पर रोक लगाने के बाद चुनाव चिन्हों का आवंटन हुआ।

तीन नवंबर को अंधेरी ईस्ट में उपचुनाव

चुनाव आयोग ने उद्धव गुट को शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे नाम और मशाल चुनाव चिन्ह की मंजूरी दी गई है। उद्धव ठाकरे कैंप की पार्टी का नाम शिवसेना जबकि शिंदे के गुट को पार्टी के चुनाव चिह्न के तौर पर दो तलवारें और एक ढाल मिली है। एकनाथ शिंदे खेमे को एक दिन पहले पोल पैनल से 'बालासाहेबंची शिवसेना (बालासाहेब की शिवसेना)' नाम मिला था।इस बीच उद्धव गुट ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) अपने कर्मचारी रुजुता लटके के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करने के लिए दबाव में था। लटके आगामी अंधेरी पूर्व उपचुनाव में टीम उद्धव की उम्मीदवार हैं। और वह तब तक चुनाव नहीं लड़ सकती हैं जब तक कि निकाय उन्हें उनकी नौकरी से मुक्त नहीं कर देती। शुक्रवार यानी 14 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है।

ललित राय
ललित रायauthor

खबरों को सटीक, तार्किक और विश्लेषण के अंदाज में पेश करना पेशा है। पिछले 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव है।

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