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UAPA के मामलों में बेमियादी समय तक जेल में नहीं रख सकते- उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने (Supreme Court) उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने का फैसले पर बड़ी टिपप्णी की है। कोर्ट ने कहा कि UAPA के नाम पर किसी को बेमियादी समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता।

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सुप्रीम कोर्ट की उमर खालिद और शरजील इमाम जमानत याचिका पर बड़ी टिप्पणी (फाइल फोटो- PTI)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आज एक फैसले के दौरान बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने का फैसला ठीक नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि उस फैसले में तीन जजों की बेंच के NIA v. KA Najeeb फैसले का सही तरीके से पालन नहीं किया गया था। यूएपीए (UAPA) जैसे सख्त कानूनों के तहत जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर किसी व्यक्ति को बेमियादी समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने दो टूक कहा कि बेल नियम है और जेल अपवाद और यह सिद्धांत सीधे संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 से आता है।

किस मामले की थी सुनवाई

जम्मू कश्मीर के एक नार्को टेरर केस में आरोपी सैय्यद इफ्तिखार अंद्राबी करीब पांच साल से जेल में बंद था। खास बात यह रही कि उसके पास से कोई नारकोटिक्स सब्सटेंस बरामद नहीं हुआ था। इसी मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने यूएपीए के तहत जमानत के कानून पर अहम टिप्पणियां कीं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि यूएपीए की धारा 43डी(5) को जमानत खारिज करने का इकलौता आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान की मूल भावना है और सख्त कानून भी इसे खत्म नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निर्दोष होने की धारणा कानून के शासन वाले हर सभ्य समाज की आधारशिला है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कानून जमानत के नियमों को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन वे स्वतंत्रता और हिरासत के बीच संवैधानिक संतुलन को उलट नहीं सकते।

छोटी बेंच बड़ी बेंच के फैसले को नजरअंदाज नहीं कर सकती

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले NIA v. KA Najeeb को फिर से सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला आज भी बाध्यकारी कानून है और इसे ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की छोटी बेंच भी नजरअंदाज नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि के ए नजीब फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि ट्रायल से पहले लंबी कैद सजा में न बदल जाए।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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