देहरादून में त्रिपुरा के एक छात्र एंजल चकमा की हत्या को लेकर देश भर में गुस्से के बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उन दावों को खारिज कर दिया कि यह हमला नस्लीय मकसद (racially motivated) से किया गया था। बढ़ती आलोचना और विरोध प्रदर्शनों पर जवाब देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ऐसी घटनाएं "कभी नहीं होतीं" और इस बात से इनकार किया कि अपराध का कोई नस्लीय एंगल था। धामी ने कहा, 'उत्तराखंड में ऐसी घिनौनी घटनाएं कभी नहीं हुई हैं। देवभूमि के लोगों ने हमेशा देश भर के लोगों का स्वागत और उन्हें स्वीकार किया है।'
उनकी यह टिप्पणी 24 वर्षीय त्रिपुरा के छात्र एंजल चकमा की मौत के बाद आई है, जिनकी देहरादून में हमले के कुछ दिनों बाद गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई थी। इस घटना से व्यापक गुस्सा फैल गया था, जिसमें राजनीतिक नेताओं और नागरिक समाज समूहों ने इसे नस्लीय हिंसा का मामला बताया और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
देहरादून नस्लीय हमला: हमला कैसे हुआ?
यह हमला 9 दिसंबर को सेलाकुई पुलिस स्टेशन इलाके में सड़क किनारे एक कैंटीन के पास हुआ। पुलिस ने बताया कि एंजल और उसके भाई माइकल चकमा को कुछ लोगों के एक समूह ने नस्लीय रूप से अपमानजनक टिप्पणियां कीं। जब भाइयों ने विरोध किया, तो स्थिति बिगड़ गई, जिसके परिणामस्वरूप हाथापाई हुई, जिसके दौरान एंजल पर धारदार हथियार और धातु के कड़े से हमला किया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि आरोपी शराब के नशे में थे, और कुछ ही मिनटों में टकराव नियंत्रण से बाहर हो गया। एंजल मौके पर ही गिर गया और उसे ग्राफिक एरा अस्पताल ले जाया गया, जहां 17 दिनों से अधिक समय तक इलाज के बाद उसकी मौत हो गई।
त्रिपुरा के छात्र एंजल चकमा की मौत कैसे हुई?
ग्राफिक एरा अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, एंजल को दो बड़ी चोटें लगी थीं: subarachnoid hemorrhage (दिमाग में खून बहना) और सर्वाइकल स्पाइन की चोट। डॉक्टरों ने उसकी पीठ पर 3 सेमी गहरा घाव, गर्दन के ऊपर सिर के पिछले हिस्से पर किसी कुंद वस्तु से लगी चोट और पैर पर खरोंच के निशान देखे। इलाज के दौरान एंजल को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि एंजेल को हेमिप्लेजिया हो गया था, जिससे उनके दाहिने अंगों में सेंसरी और मोटर दोनों फंक्शन (sensory and motor function) खत्म हो गए थे। सिर और रीढ़ की हड्डी की चोटों के मिले-जुले असर से उनके शरीर के दाहिने हिस्से में हरकत और महसूस करने की क्षमता खत्म हो गई थी। बाद में नसों को हुए नुकसान की वजह से आखिरकार उनकी मौत हो गई।
