सभापति की ओर से नाम लिए जाने के बाद राज्यसभा के नेता पीयूष गोयल ने निलंबन के लिए प्रस्ताव पेश किया। ब्रायन पर आरोप लगा कि वह राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित कर रहे थे। इसके बाद राज्यसभा के सभापति ने कहा कि वह उनका नाम ले रहे हैं। गोयल ने कहा कि 'ब्रायन सभापति के निर्देशों बार-बार अवहेलना कर रहे हैं और सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं।'
ब्रायन ने ऊंची आवाज में रखी थी बात
राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए डेरेक ने नियम 267 के तहत मणिपुर हिंसा पर चर्चा शुरू किए जाने की मांग की। सभापति धनखड़ ने डेरेक के हावभाव, उनके आचरण एवं ऊंची आवाज में अपनी बात रखने पर आपत्ति जताते हुए उन्हें अपनी सीट पर बैठने को कहा। धनखड़ ने इसके बाद कहा कि वह डेरेक का नाम लेते है।नियम 267 के तहत मणिपुर पर चाहते थे चर्चा
सदन के नेता पीयूष गोयल ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने ध्वनि मत से पारित कर दिया। व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए ओ’ब्रायन ने नियम 267 के तहत मणिपुर हिंसा पर चर्चा शुरू किए जाने की मांग की। सभापति जगदीप धनखड़ ने ओ’ब्रायन द्वारा ऊंची आवाज में अपनी बात रखने पर आपत्ति जताते हुए उन्हें अपनी सीट पर बैठने को कहा।
नाम लेने पर शुरू होती है निलंबन की कार्रवाई
धनखड़ ने इसके बाद कहा कि वह ओ’ब्रायन का नाम लेते हैं। उन्होंने सदन के नेता गोयल से इस संबंध में प्रस्ताव पेश करने को कहा। सभापति द्वारा जब किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो इसके साथ ही उसके निलंबन की कार्रवाई शुरु हो जाती है। गोयल ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि ओ’ब्रायन लगातार सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं और आसन की अवमानना कर रहे हैं।
सभापति ने ब्रायन को बाहर जाने के लिए भी कहा
उन्होंने कहा, ‘प्रस्ताव किया जाता है कि डेरेक ओ’ब्रायन को अशोभनीय आचरण के लिए सदन की सेवाओं से सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया जाए।’ गोयल के प्रस्ताव पेश करने के बाद धनखड ने ओ’ब्रायन के निलंबन की घोषणा की। उन्होंने उन्हें सदन से बाहर जाने का भी निर्देश दिया। इस बीच हंगामा होता देख धनखड़ ने उच्च सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
