देश

'जो जांच करते हैं, उनकी भी होनी चाहिए जांच', सुप्रीम कोर्ट ने आखिर क्यों की यह टिप्पणी; जानें

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त नीरज कुमार के खिलाफ दो दशक पुराने एक मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देते हुए बुधवार को कहा कि जो लोग जांच करते हैं, उनकी भी जांच होनी चाहिए। यह मामला 2001 की एक घटना से जुड़ा हुआ है, जब कुमार सीबीआई में संयुक्त निदेशक थे और उन पर एक मामले में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है।

Image

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त नीरज कुमार के खिलाफ दो दशक पुराने एक मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देते हुए बुधवार को कहा कि जो लोग जांच करते हैं, उनकी भी जांच होनी चाहिए। इस मामले में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ किए जाने और आपराधिक धमकी देने के आरोप हैं।

यह मामला 2001 की एक घटना से जुड़ा हुआ है, जब कुमार केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में संयुक्त निदेशक थे और उन पर एक मामले में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 13 मार्च 2019 को अपनी एकल पीठ के साल 2006 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी थी, जिसके तहत कुमार और तत्कालीन सीबीआई अधिकारी विनोद पांडे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

कोर्ट ने क्या कुछ कहा?

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा कि अब समय आ गया है कि जांच करने वालों की भी कभी-कभी जांच की जानी चाहिए, ताकि आम जनता का व्यवस्था में विश्वास बना रहे। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ मामले की जांच करे। उसने स्पष्ट किया कि जांच सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) स्तर से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जानी चाहिए।

पीठ ने कहा, “यह अपराध वर्ष 2000 में होने का आरोप लगाया गया है और आज तक मामले की जांच नहीं होने दी गई। अगर ऐसे अपराध की जांच न होने दी जाए, तो यह न्याय के विपरीत होगा, खासकर तब जब इसमें सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों की संलिप्तता हो।”

क्या है पूरा मामला?

शीर्ष अदालत ने “प्रमुख कानून” को रेखांकित किया, जो कहता है कि न्याय न केवल किया जाना चाहिए, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए। रिकॉर्ड के मुताबिक, शीश राम सैनी और विजय कुमार अग्रवाल नाम के दो व्यक्तियों ने क्रमशः पांच जुलाई 2001 और 23 फरवरी 2004 को पुलिस के समक्ष अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराते हुए जांच की मांग थी, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

दस्तावेजों से छेड़छाड़ का लगा आरोप

सैनी ने अपनी शिकायत में जहां कुमार और पांडे पर दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। वहीं, अग्रवाल ने दावा किया था कि कुमार के कहने पर पांडे ने उसे आपराधिक धमकी दी। उस समय सीबीआई अग्रवाल और उनके भाई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व अधिकारी अशोक अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच कर रही थी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जब पुलिस अधिकारियों ने इस आधार पर शिकायतकर्ताओं की शिकायतों पर विचार करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई कि सीबीआई अधिकारियों की जांच करना उचित नहीं है, तो उन्होंने (शिकायतकर्ताओं ने) उच्च न्यायालय का रुख किया।

हालांकि, न्यायालय ने कहा कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने से उनके प्रति कोई पूर्वाग्रह पैदा होने की संभावना नहीं है। उसने कहा कि अधिकारियों को यह साबित करने के लिए जांच में हिस्सा लेने का अधिकार होगा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article