मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई गई। इसके बाद शुक्रवार को उनकी संसद सदस्यता खत्म हो गई। वे अब वायनाड से सांसद नहीं रहे। कोर्ट फैसले के एक दिन बाद 24 मार्च को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को अयोग्य ठहरा दिया। इसके बाद देश की सियासत में हड़कंप मच गया। राहुल गांधी के समर्थन में अन्य राजनीतिक दल भी आ गए। अक्सर कांग्रेस के खिलाफ बोलने वाली टीएमसी भी उनके समर्थन में आ गई। टीएमसी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
ममता बनर्जी ने ट्वीट किया कि पीएम मोदी के न्यू इंडिया में बीजेपी के निशाने पर विपक्षी नेता! जबकि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले बीजेपी नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाता है, विपक्षी नेताओं को उनके भाषणों के लिए अयोग्य ठहराया जाता है। आज, हमने अपने संवैधानिक लोकतंत्र के लिए एक नया निम्न स्तर देखा है।
इस नियम के तहत अयोग्य हुए राहुल गांधी
केरल की वायनाड संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे राहुल गांधी को सूरत की एक अदालत ने वर्ष 2019 के मानहानि के एक मामले में सजा सुनाई। उसके बाद शुक्रवार को उन्हें लोकसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराया गया। लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि उनकी अयोग्यता संबंधी आदेश 23 मार्च से प्रभावी होगा। अधिसूचना में कहा गया है कि राहुल गांधी संविधान के अनुच्छेद 102 (1) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 धारा 8 के तहत अयोग्य घोषित किये गए हैं। इसमें कहा गया है कि सूरत की एक अदालत द्वारा मानहानि के एक मामले में सजा सुनाये जाने के मद्देनजर केरल की वायनाड संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे राहुल गांधी को 23 मार्च 2023 से अयोग्य ठहराया जाता है।
इस मामले में राहुल को मिली 2 साल की सजा
गौर हो कि सूरत की एक अदालत ने मोदी सरनेम संबंधी टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ 2019 में दर्ज आपराधिक मानहानि के एक मामले में उन्हें 23 मार्च 2023 को 2 साल जेल की सजा सुनाई। अदालत ने हालांकि गांधी को जमानत दे दी और उनकी सजा के अमल पर 30 दिनों तक के लिए रोक लगा दी, ताकि कांग्रेस नेता फैसले को चुनौती दे सकें।
