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'अतीक-अशरफ हत्याकांड में पुलिस की कोई गलती नहीं...', सुप्रीम कोर्ट में बोली यूपी सरकार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 3, 2023, 06:51 AM IST

UP News: पुलिस कस्टडी में माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ को गोलियों से भून दिया गया था। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद जमकर बवाल मचा था। अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक स्टेटस रिपोर्ट में यूपी सरकार ने कहा है कि इस हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस की कोई गलती नहीं थी।

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अतीक-अशरफ हत्याकांड

Photo : BCCL

UP News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस कस्टडी में अतीक-अशरफ हत्याकांड में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में यूपी सरकार ने कहा है कि इस हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस की कोई गलती नहीं थी। साथ ही यूपी सरकार ने यह भी कहा है कि उसने इस घटना और अन्य मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इनमें गैंगस्टर विकास दुबे की हत्या और 2017 के बाद से विभिन्न पुलिस मुठभेड़ शामिल हैं।

बता दें, पुलिस कस्टडी में माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ को गोलियों से भून दिया गया था। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद जमकर बवाल मचा था और विपक्षी पार्टियों ने इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल भी खड़े किए थे। इस मामले की जांच के लिए सरकार को निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई थी।

जांच में पुलिस की कोई गलती नहीं

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में अतीक-अशरफ हत्याकांड और विकास दुबे एनकाउंटर समेत सात घटनाओं का जिक्र किया गया था। इन मामलों में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में सरकार ने कहा है कि अभी तक की जांच में पुलिस की कोई गलती नहीं पाई गई है। सबूत इकट्ठा करने के लिए पुलिस की जांच अभी तक जारी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह भी कहा कि विकास दुबे मामले में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अपराधियों के संबंध में दर्ज मामलों की जांच और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा चल रही जांच के संबंध में सभी जोन या कमिश्नरेट से जानकारी प्राप्त करने के बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर नियमित समीक्षा की गई है।

15 अप्रैल को हुई थी अतीक की हत्या

बता दें, प्रयागराज में बीते 15 अप्रैल को माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिस समय यह हत्या हुई, दोनों पुलिस कस्टडी में थे और मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस दौरान पत्रकार बनकर तीन लोगों ने दोनों पर ताबड़तोड़ गोलियां दागीं और माफिया बंधुओं को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना की फुटेज भी वायरल हुई थी। पुलिस ने तीनों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान अरुण मौर्या, सनी और लवलेश तिवारी के रूप में की गई थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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