भारत का UN पर तीखा सवाल- वैश्विक शांति सुनिश्चित करने में अप्रासंगिक होता जा रहा संयुक्त राष्ट्र
- Edited by: शिशुपाल कुमार
- Updated Jan 27, 2026, 05:53 PM IST
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने मौजूदा भू-राजनीतिक हालात के बीच यूएन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा कि आज दुनिया संयुक्त राष्ट्र को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली प्रभावी संस्था के रूप में नहीं देख रही है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश
भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अब अंतरराष्ट्रीय शांति सुनिश्चित करने वाली संस्था के रूप में नहीं देखा जा रहा है और शांति एवं सुरक्षा से जुड़े परिणाम हासिल करने के लिए चर्चाएं ‘‘समानांतर बहुपक्षीय ढांचों’’ की ओर बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने सोमवार को यहां ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन की पुनः पुष्टि: शांति, न्याय और बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने के मार्ग’ विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा, ‘‘सार्वभौमिक सदस्यता वाले बहुपक्षवाद, जिसके केंद्र में संयुक्त राष्ट्र है, पर दबाव बढ़ रहा है। इस संगठन के सामने चुनौतियां केवल बजटीय नहीं हैं। संघर्षों से निपटने में जड़ता और प्रभावहीनता इसकी एक बड़ी कमी बनी हुई है।’’
भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश का संबोधन
हरीश ने कहा कि दुनिया भर के लोग संयुक्त राष्ट्र को ऐसी संस्था के रूप में नहीं देखते जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा प्रदान कर सके। उन्होंने कहा, ‘‘चर्चाएं अब समानांतर बहुपक्षीय ढांचों की ओर बढ़ गई हैं, जिनमें कुछ मामलों में निजी क्षेत्र के भागीदार भी शामिल हैं, ताकि संयुक्त राष्ट्र के ढांचे से बाहर शांति और सुरक्षा से जुड़े परिणाम हासिल किए जा सकें।’’
भारत ने किन-किन मुद्दों पर उठाए सवाल
हरीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन का अनुप्रयोग निरंतरता, वस्तुनिष्ठता और पूर्वानुमेयता पर आधारित होना चाहिए तथा इसमें दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन का उपयोग किसी देश की संप्रभुता पर सवाल उठाने या उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए नहीं किया जाना चाहिए। हरीश ने कहा कि भारत अपने संविधान, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्याय तक पहुंच बढ़ाने वाली पहलों के माध्यम से कानून के शासन को अपने राष्ट्रीय शासन की आधारशिला मानता है और यही प्रतिबद्धता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के दृष्टिकोण को दिशा देती है। भारत ने सुरक्षा परिषद में यह भी कहा कि लागू किए बिना कानून का शासन ‘‘निष्प्रभावी’’ है और वैश्विक शासन संरचनाओं, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद के ढांचे में व्यापक सुधार की तत्काल आवश्यकता है, ताकि वह समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सके और अपनी प्रासंगिकता बनाए रखे।
लगातार विफल रहा है UN
भारत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब संयुक्त राष्ट्र और उसके सबसे शक्तिशाली अंग सुरक्षा परिषद की वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों को रोकने और सुलझाने में लगातार विफलता सामने आ रही है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए अपना ‘शांति बोर्ड’ शुरू किया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प या प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई वैश्विक नेताओं को अपने ‘शांति बोर्ड’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। यह बोर्ड गाजा में स्थायी शांति लाने और "वैश्विक संघर्षों" को सुलझाने के लिए एक "नए साहसपूर्ण तरीके" पर काम करेगा।
भाषा की रिपोर्ट
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