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लोकसभा के 8 निलंबित सांसदों का सस्पेंशन हो सकता है वापस, सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति

लोकसभा के आठ निलंबित विपक्षी सांसदों का निलंबन मंगलवार को वापस लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर सहमति बनती दिखाई दी है।

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (फाइल फोटो)

लोकसभा के 8 निलंबित विपक्षी सांसदों का निलंबन मंगलवार यानी 17 मार्च को वापस लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर लोकसभा स्पीकर की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई और कई दलों के बीच सहमति बनने के संकेत मिले हैं। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार होता है तो मंगलवार को सदन में प्रस्ताव लाकर इन सांसदों का निलंबन समाप्त किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, विपक्ष की ओर से लोकसभा में निलंबन वापस लेने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस प्रस्ताव को निचले सदन में लाया जाएगा और उस पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष का मानना है कि संसद के सुचारु संचालन के लिए सभी दलों के बीच संवाद और सहमति जरूरी है, इसलिए इस मुद्दे का समाधान भी सदन के भीतर ही निकाला जाना चाहिए।

बैठक में विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी राय रखी

बताया जा रहा है कि स्पीकर द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी राय रखी और संसद की कार्यवाही को सुचारु ढंग से चलाने पर जोर दिया। सूत्रों का कहना है कि चर्चा के दौरान इस बात पर भी सहमति बनी कि संसद में विरोध और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और परंपराओं का पालन भी जरूरी है।

बैठक में सांसदों के आचरण और सदन की गरिमा बनाए रखने के मुद्दे पर भी गंभीरता से चर्चा हुई। स्पीकर ने इस बात पर जोर दिया कि संसद में ऐसी कोई परंपरा विकसित नहीं होनी चाहिए जो भविष्य में गलत मिसाल बन जाए। उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और यहां होने वाला हर व्यवहार आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बनता है, इसलिए सभी सांसदों को मर्यादा और नियमों का पालन करना चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में यह भी चर्चा हुई कि विरोध जताने वाले सांसदों को सदन के वेल में जाकर दूसरी तरफ नहीं जाना चाहिए। वेल में आकर नारेबाजी या विरोध करना पहले भी कई बार विवाद का कारण बन चुका है, इसलिए इस तरह की घटनाओं से बचने की जरूरत पर जोर दिया गया।

सदन के भीतर कागज फाड़ने और उन्हें फेंकने जैसी घटनाओं को भी अनुचित बताया

इसके अलावा सदन के भीतर कागज़ फाड़ने और उन्हें फेंकने जैसी घटनाओं को भी अनुचित बताया गया। बैठक में मौजूद नेताओं ने माना कि ऐसी घटनाएं संसद की गरिमा को प्रभावित करती हैं और इससे जनता के बीच गलत संदेश जाता है। इसलिए इस तरह के व्यवहार को रोकने और संसदीय मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई गई। सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को लोकसभा में प्रस्ताव लाए जाने के बाद अगर सदन सहमत होता है तो निलंबित विपक्षी सांसदों का निलंबन समाप्त किया जा सकता है। इससे संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

Ranjeeta Jha
रंजीता झाauthor

13 साल के राजनीतिक पत्रकारिता के अनुभव में मैंने राज्य की राजधानियों से लेकर देश की राजधानी तक सियासी हलचल को करीब से देखा है। प्लांट की गई बातें ख़बरें नहीं होती बल्कि बातों के पीछे छुपी सच्चाई असली ख़बर होती है। खबरें वही जो आपके सरोकार की हो वो आपतक लेकर आऊंगी।

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