अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष और मिडिल ईस्ट के हालातों पर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप न किया होता तो इजराइल का अस्तित्व समाप्त हो जाता और पूरे मिडिल ईस्ट का नामोनिशान मिट जाता, लेकिन उन्होंने इसे रोक लिया। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे और इस दिशा में कड़े कदम उठाए गए हैं।
हथियार बिक्री के बयानों पर क्या बोले ट्रंप
ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अमेरिका से हथियार खरीदने को लेकर बातचीत करने से इनकार किया। उनका यह बयान चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू के हालिया बयान से अलग है। परड्यू ने ‘फॉक्स न्यूज संडे’ को बताया था कि ट्रंप ने शी जिनपिंग से पूछा था कि क्या चीन अमेरिकी हथियार खरीदने में दिलचस्पी रखता है। हालांकि, बाद में उन्होंने संकेत दिया कि शायद ट्रंप चीन की जगह ताइवान का जिक्र कर रहे हों। इस संबंध में जब सोमवार को ट्रंप से पूछा गया तो उन्होंने कहा, “चीन को? आपका मतलब ताइवान से है?” उन्होंने ऐसी किसी बातचीत की जानकारी न होने की बात कही, साथ ही यह भी कहा कि चीन को अमेरिकी हथियार देने का विचार “शायद अच्छा विचार” हो सकता है।
आयोवा में बनेगा अमेरिका का सबसे बड़ा स्टील प्लांट
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी कानून चीन को हथियार बेचने पर रोक लगाता है। मंत्रालय के अनुसार, चीन को अमेरिकी हथियार बेचने का कोई प्रस्ताव या योजना नहीं है। परड्यू ने यह भी कहा था कि ताइवान के मामले में ट्रंप का रुख मजबूत है और ताइवान को भारी मात्रा में अमेरिकी हथियार बेचे गए हैं। ट्रंप ने अमेरिका में स्टील उत्पादन को लेकर भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि आयोवा में अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बनाया जाएगा।
कनाडा के साथ रिश्तों पर भी बोले ट्रंप
कनाडा के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर ट्रंप ने कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ डील करना चाहता है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा ने अतीत में अमेरिका के साथ “बहुत गलत व्यवहार” किया है। उन्होंने इसी को दोनों देशों के बीच बातचीत में समस्या बताया।
