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कौन हैं सुरेश गोपी? जिन्होंने केरल में खत्म किया BJP का सूखा, दिलाई बड़ी जीत

Who is Suresh Gopi: केरल में बीजेपी के लिए पहली सीट जीतकर साउथ एक्टर सुरेश गोपी ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने सीपीआई के वी.एस. सुनील कुमार और मौजूदा कांग्रेस सांसद के. मुरलीधरन को हराकर त्रिशूर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। सुरेश गोपी ने 74,686 वोटों के अंतर से जीत अपने नाम की।

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Suresh Gopi, BJP candidate from Thrissur

Photo : Twitter

Who is Suresh Gopi: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे भले ही भारतीय जनता पार्टी के लिए आत्मचिंतन का विषय हों, लेकिन इस चुनावी रिजल्ट ने दक्षिण भारतीय राज्यों में भाजपा की उम्मीदों को कायम रखा है। विशेष तौर पर इस चुनावी परिणाम ने केरल की राजनीति में बीजेपी का सूखा तो खत्म किया ही, साथ ही बीजेपी के वोटिंग प्रतिशत में भी यहां बड़ा इजाफा दर्ज किया है, जिससे बीजेपी के थिंकटैंक को शुभ संकेत मिले हैं।

दरअसल, केरल में बीजेपी के लिए पहली सीट जीतकर साउथ एक्टर सुरेश गोपी ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने सीपीआई के वी.एस. सुनील कुमार और मौजूदा कांग्रेस सांसद के. मुरलीधरन को हराकर त्रिशूर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उन्होंने 74,686 वोटों के अंतर से जीत अपने नाम की। आइए जानते हैं कौन हैं सुरेश गोपी? कैसा है उनका फिल्मी और राजनीतक करियर? और केरल में बीजेपी की इस जीत के मायने क्या हैं?

मलयालम सिनेमा का बड़ा नाम

अभिनेता से नेता बने सुरेश गोपी मलयालम सिनेमा का बड़ा नाम हैं। केलर के अलप्पुझा में 1958 में जन्मे सुरेश गोपी ने जूलॉजी में बैचलर डिग्री के बाद इंग्लिश लिटरेचर से एमए किया है। इसके बाद उन्होंने फिल्मों का रुख किया और एक के बाद एक कई हिट फिल्में की हैं। सुरेश गोपी फिल्म अभिनेता होने के साथ-साथ प्लेबैक सिंगर भी हैं। बात करें अगर एक्टिंग करियर की करें तो सुरेश गोपी ने अपने 32 साल के करियर में 250 से ज्यादा फिल्में की है। उन्होंने 'मणिचित्राथाझु', 'ए नॉर्दर्न स्टोरी ऑफ वेलोर' और 'ओरु सीबीआई डायरी कुरिप्पु' समेत कई फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया है। उन्होंने 1998 में आई फिल्म 'कलियाट्टम' के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी जीता था।

दो बार चुनाव हारे

सुरेश गोपी 2024 के चुनाव में जीत से पहले दो बार चुनाव हार भी चुके हैं। उन्होंने, अक्टूबर 2016 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी। इसके बाद सुरेश गोपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में त्रिशूर से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। दो साल बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। दो बार हार झेलने के बाद आखिरकार लोकसभा चुनाव 2024 में उनकी जीत हुई।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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