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गोरखा मुद्दे के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम, शाह की बैठक में बनाई गई हाईलेवल कमेटी

बैठक में दार्जिलिंग की पहाड़ियों के साथ-साथ तराई और दुआर्स क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। केंद्र ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समाधान भारत के संविधान के दायरे में होगा। समिति अंतिम समझौते के लिए जरूरी तौर-तरीकों और प्रस्तावित समझौते के विवरण पर काम करेगी।

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गोरखा मुद्दे के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम (फोटो- pti)

दार्जिलिंग की पहाड़ियों और उत्तर बंगाल के गोरखा बहुल इलाकों से जुड़े लंबे समय से लंबित राजनीतिक और पहचान के मुद्दे के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में शनिवार को सुकना में हुई अहम बैठक के बाद ‘स्थायी राजनीतिक समाधान’ के लिए एक हाईलेवल कमेटी गठित करने का फैसला किया। समिति की अगुवाई केंद्र के वार्ताकार और पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पंकज कुमार सिंह करेंगे।

बैठक में दार्जिलिंग की पहाड़ियों के साथ-साथ तराई और दुआर्स क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। केंद्र ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समाधान भारत के संविधान के दायरे में होगा। समिति अंतिम समझौते के लिए जरूरी तौर-तरीकों और प्रस्तावित समझौते के विवरण पर काम करेगी।

अमित शाह ने दिया स्थायी समाधान का भरोसा

गृह मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में गोरखा समुदाय की अलग पहचान, स्थायी राजनीतिक समाधान और संविधान के तहत मान्यता से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। अमित शाह ने आश्वासन दिया कि केंद्र संविधान की छतरी के तहत जल्द स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने समुदाय की अन्य मांगों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की बात कही। केंद्र की ओर से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिया गया।

बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?

सुकना में हुई बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्ता, राज्यसभा सांसद हर्ष वर्धन श्रृंगला, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) प्रमुख बिमल गुरुंग, GNLF प्रमुख मान घीसिंग और पहाड़ी मामलों के राज्य मंत्री बिशाल लामा समेत कई नेता और अधिकारी शामिल हुए। पहाड़ी क्षेत्रों के कई विधायक और अन्य गोरखा प्रतिनिधि भी बैठक का हिस्सा रहे।

बैठक के बाद राजू बिस्ता ने इसे बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक बताया। GJM महासचिव रोशन गिरी ने भी कहा कि बैठक संतोषजनक रही। उन्होंने कहा कि गोरखा नेतृत्व संवैधानिक तरीके से समाधान खोजने के लिए केंद्र के साथ काम करने को प्रतिबद्ध है।

क्या है गोरखालैंड का मुद्दा?

दरअसल, दार्जिलिंग की पहाड़ियों में अलग राजनीतिक पहचान और अधिक स्वायत्तता की मांग कई दशकों से चली आ रही है। 1980 के दशक में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था। इसके बाद 1988 में केंद्र,पश्चिम बंगाल सरकार और GNLF के बीच समझौते के बाद दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल (DGHC) का गठन किया गया। हालांकि,इससे राजनीतिक विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। बाद में 2011 के त्रिपक्षीय समझौते के तहत गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) बनाया गया, लेकिन गोरखा समुदाय की राजनीतिक पहचान और स्थायी संवैधानिक समाधान से जुड़े कई सवाल बने रहे।

अब आगे क्या होगा?

ऐसे में केंद्र की ओर से समिति बनाने का फैसला इस पूरे मुद्दे को एक नए चरण में ले जाता है। समिति विभिन्न पक्षों से बातचीत के बाद संभावित समझौते की रूपरेखा और उसके क्रियान्वयन के तौर-तरीके तय करेगी। इसके बाद अंतिम समझौते का मसौदा तैयार किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि, अभी किसी अंतिम राजनीतिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

इस पूरी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र ने समाधान को स्पष्ट रूप से संवैधानिक दायरे में रखने की बात कही है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि गोरखा नेताओं की अलग पहचान, राजनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय प्रशासन से जुड़ी मांगों को प्रस्तावित समझौते में किस तरह जगह मिलती है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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