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ED डायरेक्टर संजय मिश्रा का सेवा विस्तार अवैध, SC ने 31 जुलाई तक नई नियुक्ति का दिया आदेश

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 11, 2023, 02:46 PM IST

Supreme Court News: प्रवर्तन निदेशालय के डायरेक्ट संजय मिश्रा और केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने संजय मिश्रा के सेवा विस्तार को अवैध बताया है।

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Supreme Court News: प्रवर्तन निदेशालय के डायरेक्ट संजय मिश्रा और केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने संजय मिश्रा के सेवा विस्तार को अवैध बताया है। हालांकि, संजय मिश्रा 31 जुलाई तक इस पद पर बने रहेंगे। कोर्ट ने 31 जुलाई के बाद केंद्र के नए डॉयरेक्टर की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ईडी के निदेशक संजय मिश्रा के कार्यकाल को घटा दिया है। पहले उन्हें सेवा विस्तार के तहत 18 नवंबर को रिटायर होना था। हालांकि, अब वह 31 जुलाई तक ही इस पद पर बने रहेंगे। अता दें, केंद्र सरकार ने लगातार तीसरी बार कार्यकाल बढ़ाया था। हालांकि कोर्ट ने CVC और DSPE एक्ट में किये गए संशोधन की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। इन संशोधन के जरिये CBI और ED निदेशक का कार्यकाल 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है।

15 दिन में नए निदेशक की तलाश करे केंद्र

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 15 दिन में प्रवर्तन निदेशालय का नया निदेशक तलाश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सेवा विस्तर के नियम वाले कानून में संशोधन सही है। हालांकि, लगातार तीसरी बार संजय मिश्रा को दिया गया सेवा विस्तार अवैध है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हमने 2021 में आवेद दिया था कि उनका कार्यकाल न बढ़ाया जाए, इसके बावजूद उनको तीसरा सेवा विस्तार दिया गया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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